नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फायरब्रांड सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर बेहद तीखा और चौकाने वाला हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली ऐतिहासिक नीतियों को आड़े हाथों लिया और कहा कि “कांग्रेस-नेहरू-गांधी परिवार का मतलब ‘समस्याएं पैदा करने वाली मशीन’ है।”
13 जुलाई 1947 को बताया ‘काला अध्याय’
सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में 13 जुलाई 1947 की तारीख का जिक्र करते हुए इसे कांग्रेस के इतिहास का “काला अध्याय” करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लेडी एडविना माउंटबेटन के दबाव में आकर महात्मा गांधी के विचारों को दरकिनार किया और भारत के विभाजन को स्वीकार कर लिया।
विभाजन की समितियों पर उठाए सवाल
भाजपा सांसद ने दावा किया कि 30 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने बंगाल और पंजाब के विभाजन के लिए रेडक्लिफ के नेतृत्व में एक समिति बनाने का निर्णय लिया था, जिसका गठन 13 जुलाई 1947 को हुआ।
दुबे ने आरोप लगाते हुए कहा:
“बंगाल समिति के कारण हमें पूरा चटगांव हिल ट्रैक्ट्स और सिल्हाट जिला (जहां हिंदू बहुमत में थे) गंवाना पड़ा। अगर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हस्तक्षेप न किया होता, तो कोलकाता भी पाकिस्तान का हिस्सा बन जाता। नेहरू, जिन्ना और सुहरावर्दी के बीच हुए समझौते के मुताबिक, कोलकाता 6 महीने के लिए पाकिस्तान की दूसरी राजधानी बनने जा रहा था, जिसका विरोध सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने किया।”
लाहौर, करतारपुर और कश्मीर विवाद का किया जिक्र
पंजाब विभाजन को लेकर भी उन्होंने तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हिंदू-सिख बहुल लाहौर के साथ-साथ करतारपुर साहिब और ननकाना साहिब गुरुद्वारा भी पाकिस्तान को दे दिया गया।
इसके अलावा, उन्होंने मालदा, मुर्शिदाबाद, दार्जिलिंग, गुरदासपुर और फिरोजपुर के विभाजन के तरीकों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इन्हीं गलत फैसलों के कारण आज देश को घुसपैठ, आतंकवाद, ड्रग तस्करी और पशु तस्करी जैसी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
