श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करने की अपील की गई है। प्रस्ताव पेश होते ही विधानसभा में हंगामा शुरू हो गया और भाजपा विधायकों ने इसका विरोध किया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से परिसीमन, चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया का वादा किया गया था। उनके मुताबिक परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए अब पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा के जरिए केंद्र सरकार को किए गए इस वादे की याद दिलाई जा रही है।
प्रस्ताव में 2000 और 2024 के प्रस्तावों का भी जिक्र
विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को सदन से पारित प्रस्तावों का भी संदर्भ दिया गया है। नए प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आग्रह किया गया है और इसे केंद्र सरकार को भेजने की बात कही गई है।
ओमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि मौजूदा प्रस्ताव का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग को केंद्र तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर से जुड़ा विषय है।
2000 के प्रस्ताव के संदर्भ पर BJP का विरोध
प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव का संदर्भ आने पर भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताई। BJP सदस्यों ने कहा कि वे सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं देंगे। विरोध के दौरान भाजपा विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ने की बात भी सामने आई। हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
वहीं, सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। रिपोर्टों के अनुसार PDP और विधानसभा के एकमात्र AAP सदस्य ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। प्रस्ताव पर आगे चर्चा और मतदान की प्रक्रिया सदन की कार्यवाही के अनुसार आगे बढ़ेगी।
ओमर ने BJP से स्पष्ट रुख बताने को कहा
प्रस्ताव पेश करने के बाद ओमर अब्दुल्ला ने भाजपा से राज्य के दर्जे के मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन में इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए और उसके बाद सभी दलों को मतदान के जरिए अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दो साल का इंतजार काफी लंबा समय है।
जम्मू-कश्मीर को अगस्त 2019 में दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में पुनर्गठित किया गया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए और निर्वाचित सरकार का गठन हुआ। अब मुख्यमंत्री की ओर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
