नई दिल्ली, 3 अगस्त: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आयोजित चुनावों को लेकर एक नए विश्लेषण में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल मतदान केंद्रों पर बैलेट बॉक्स स्थापित कर देने से चुनाव लोकतांत्रिक नहीं हो जाते। किसी भी चुनाव की वास्तविक लोकतांत्रिक पहचान स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त मतदान प्रक्रिया से होती है।
विश्लेषण के अनुसार, PoJK में चुनावी प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर राजनीतिक हस्तक्षेप, विपक्षी दलों पर दबाव, हिंसा, धांधली के आरोप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध जैसी परिस्थितियों ने चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट का दावा है कि जब मतदाताओं और राजनीतिक दलों को समान अवसर नहीं मिलता तथा चुनावी माहौल स्वतंत्र नहीं होता, तब केवल मतदान करवा देना लोकतंत्र का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकतंत्र केवल बैलेट बॉक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत और स्वतंत्र संस्थाओं, निष्पक्ष चुनाव आयोग, कानून के समान शासन, स्वतंत्र मीडिया तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित होता है। यदि ये सभी तत्व मौजूद नहीं हैं, तो चुनावों की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक वैधता दोनों प्रभावित होती हैं।
विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि PoJK में होने वाले चुनाव लंबे समय से विवादों के घेरे में रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समय-समय पर इनकी पारदर्शिता को लेकर प्रश्न उठते रहे हैं। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि केवल मतदान केंद्रों पर बैलेट बॉक्स की मौजूदगी लोकतंत्र का प्रमाण नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्र चुनावी प्रक्रिया का पालन ही किसी चुनाव की वास्तविक कसौटी है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
