नई दिल्ली:
बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी निजी विचारधारा और धार्मिक यात्रा में आए बदलाव को लेकर उठ रहे सवालों का करारा जवाब दिया है। हाल ही में साझा किए गए एक वीडियो में कंगना ने स्पष्ट किया कि वे एक “जागृत हिंदू” बनना चाहती हैं और संघी (आरएसएस विचारधारा) के रूप में पहचाने जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
- संघी’ कहे जाने पर दिया जवाब: कंगना रनौत ने कहा कि जब वे हिंदुत्व के समर्थन में खुलकर बोलती हैं, तो लोग उन पर ‘संघी’ होने का ठप्पा लगा देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी व्यक्ति को जीवन में आध्यात्मिक या वैचारिक रूप से बदलने का अधिकार नहीं है?
- संविधान और आस्था की आज़ादी: अपने पुराने वीडियो और बीते समय के लाइफस्टाइल को लेकर हो रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को अपने अतीत का हिसाब दिए बिना अपनी आस्था चुनने और बदलने की पूरी स्वतंत्रता देता है।’
- हिंदू बेटियों पर सवाल क्यों?’: कंगना ने दुख जताते हुए कहा कि जब कोई हिंदू महिला अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए आवाज उठाती है या आइटम नंबर्स और नेपोटिज्म जैसी चीजों का विरोध करती है, तो लोग उसके अतीत के 10 साल पुराने वीडियो निकालकर उस पर सवाल उठाने लगते हैं।
कंगना रनौत का बयान:”
अगर कोई सेक्युलर रहना चाहता है तो संविधान उसे उसकी इजाजत देता है। लेकिन अगर मैं एक जागृत हिंदू बनना चाहती हूँ और अपनी विचारधारा बदलना चाहती हूँ, तो मुझ पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? लोगों को अपने अतीत के आधार पर आंके बिना नया मार्ग चुनने का संवैधानिक अधिकार है।”
क्या है पूरा मामला?
संसद सत्र के दौरान मीडिया व सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयानों और लाइफस्टाइल के वीडियो वायरल कर उन्हें घेरा जा रहा था। आलोचकों का कहना था कि कंगना पहले मॉडरेट (उदारवादी) थीं, लेकिन अब वे आक्रामक हिंदुत्व की राह पर हैं। इस पर कंगना ने दोटूक अंदाज़ में कहा कि बदलाव जीवन की प्रक्रिया है और वे गर्व से अपने धर्म और विचारधारा के साथ खड़ी हैं।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
