बेंगलुरु। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद गाए जाने को लेकर कर्नाटक में सियासी विवाद तेज हो गया है। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और बढ़ गई है। हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया कि वह वंदे मातरम् के केवल दो छंद ही गाएंगे, भले ही इसके लिए उन्हें जेल जाना पड़े या फांसी की सजा क्यों न हो।
हरिप्रसाद का तर्क है कि कर्नाटक में लंबे समय से वंदे मातरम् के दो छंद गाने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि परंपरा में अचानक बदलाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
छह छंदों को लेकर क्या है विवाद?
विवाद इस बात को लेकर है कि वंदे मातरम् के कितने छंद आधिकारिक तौर पर गाए जाने चाहिए। पूरे छह छंद गाने की बात को लेकर भाजपा की ओर से जोर दिया जा रहा है, जबकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कार्यक्रमों में पारंपरिक रूप से इसके दो छंद ही गाए जाते रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रगीत को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे पुरानी परंपरा और कार्यक्रम की निर्धारित प्रक्रिया से जोड़कर देख रही है।
खरगे ने भी किया कांग्रेस के रुख का बचाव
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस विवाद पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि कांग्रेस उसी परंपरा का पालन कर रही है, जिसके तहत वंदे मातरम् का गायन पहले भी किया जाता रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी इसी परंपरा के अनुरूप राष्ट्रगीत गा रही है।
भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
हरिप्रसाद के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां वंदे मातरम् के सभी छंदों के सम्मान और गायन पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस दो छंदों की पारंपरिक व्यवस्था का हवाला दे रही है।
फिलहाल वंदे मातरम् के छह छंदों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर दोनों दलों के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है।
