7 सीटों पर चुनाव, लेकिन चर्चा सिर्फ एक की; कर्नाटक MLC चुनाव में सातवीं सीट ने बढ़ाया सियासी रोमांच

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बेंगलुरु, 18 जून 2026। कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) की सात सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शुरू हो गया। चुनावी प्रक्रिया के साथ ही राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सातवीं सीट को लेकर हो रही है, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का माना जा रहा है।

मतदान के बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों की एकजुटता पर भरोसा जताते हुए सभी उम्मीदवारों की जीत का दावा किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है और उसे किसी भी प्रकार के अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस को उम्मीद है कि उसके सभी उम्मीदवार आसानी से जीत दर्ज करेंगे।

वहीं भाजपा ने कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाते हुए उस पर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” का आरोप लगाया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि क्रॉस-वोटिंग के डर से कांग्रेस ने अपने विधायकों को रिसॉर्ट में रखा, जो पार्टी के अंदरूनी हालात को दर्शाता है। भाजपा ने यह भी दावा किया कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं और सहयोगी जेडीएस के साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

  • सात सीटें, आठ उम्मीदवार और बढ़ता रोमांच

विधान परिषद की सात सीटों के लिए कुल आठ उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण एक उम्मीदवार की हार तय मानी जा रही है। यही वजह है कि चुनाव का गणित बेहद रोचक हो गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार सबसे कड़ा मुकाबला सातवीं सीट पर देखने को मिल सकता है, जहां वोटों का संतुलन और संभावित क्रॉस-वोटिंग परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

कांग्रेस और जेडीएस के उम्मीदवारों के बीच इस सीट को लेकर विशेष मुकाबला माना जा रहा है। भाजपा भी अपने अतिरिक्त वोटों के सहारे सहयोगी दल को फायदा पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।

  • जीत के लिए 28 वोट जरूरी

चुनाव नियमों के मुताबिक प्रत्येक उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 28 वोट हासिल करने होंगे। मतदान शाम 4 बजे तक चलेगा, जिसके बाद मतगणना शुरू होगी और देर शाम तक परिणाम सामने आने की संभावना है।

  • नतीजे तय करेंगे राजनीतिक संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ विधान परिषद की सात सीटों का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य में राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत और रणनीतिक क्षमता की भी परीक्षा है। कांग्रेस के लिए यह अपनी संख्या और एकजुटता साबित करने का अवसर है, जबकि भाजपा और जेडीएस गठबंधन इसे सरकार के खिलाफ राजनीतिक बढ़त हासिल करने के मौके के रूप में देख रहे हैं।

ऐसे में सभी की निगाहें अब चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो कर्नाटक की राजनीति में आने वाले दिनों के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। खास तौर पर सातवीं सीट का नतीजा राज्य की सियासत में बड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।

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