छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: फरार चल रहे कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे से EOW की मैराथन पूछताछ, ‘आर्थिक सिंडिकेट’ पर कड़े सवाल

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रायपुर :

छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों को हिलाकर रख देने वाले कथित शराब और कोल लेवी घोटाले में एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ आ गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अपनी जांच का रुख अब ‘मनी ट्रेल’ और ‘फरारी’ के नेटवर्क की तरफ मोड़ दिया है। इसी सिलसिले में कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल को हिरासत जैसी कस्टडी में लेकर घंटों पूछताछ की गई है।

इनवेस्टिगेशन डायरी: EOW के वो 3 बड़े सवाल

सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारियों ने वैभव अग्रवाल के सामने दस्तावेजों का पुलिंदा रखकर मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर पूछताछ की:

  1. ‘लापता’ पिता कहाँ हैं? रामगोपाल अग्रवाल पिछले 3 साल से सार्वजनिक रूप से गायब हैं। EOW को इनपुट मिला है कि वे देश से बाहर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में ही कहीं अंडरग्राउंड हैं। वैभव से उनके ठिकानों की सटीक जानकारी मांगी गई।
  2. 3 साल का वित्तीय नेटवर्क: रामगोपाल अग्रवाल के गायब रहने के दौरान उनके परिवार और करीबियों के बैंक खातों में हुए ट्रांजैक्शंस और बिजनेस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी गईं।
  3. अवैध कैश का फ्लो: सिंडिकेट के जरिए कमाए गए करोड़ों रुपये को ठिकाने लगाने में किसकी क्या भूमिका थी?

एक नजर में: घोटालों का पूरा गणित

जांच एजेंसियों (ED और EOW) की चार्जशीट और दावों के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल का नाम प्रदेश के तीन सबसे बड़े सिंडिकेट्स में मुख्य कड़ियों के रूप में दर्ज है:

  • ₹3,200 करोड़ का शराब सिंडिकेट: सरकारी सिस्टम के समानांतर अवैध शराब बेचकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का आरोप।
  • ₹450 करोड़ का कोल लेवी रैकेट: कोयला परिवहन (कोल ट्रांसपोर्ट) पर प्रति टन अवैध वसूली का नेटवर्क।
  • ₹127 करोड़ का कस्टम मिलिंग स्कैम: राइस मिलर्स से प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले कमीशनखोरी।

क्या था इन घोटालों का ‘मॉडस ऑपेरेंडी’ (काम करने का तरीका)?

शराब घोटाले की इनसाइड स्टोरी

छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में गिना जाता है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की जांच के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में एक कथित संगठित नेटवर्क के जरिए अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

हालांकि वैभव अग्रवाल को देर शाम पूछताछ के बाद घर जाने दिया गया और उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन EOW के इस रुख से साफ है कि जांच एजेंसियां अब इस मामले के अंतिम छोर तक पहुंचना चाहती हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वैभव से मिले इनपुट्स के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार लोगों पर शिकंजा कसा जा सकता है।

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