नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के तलाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े वर्षों पुराने मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करते हुए मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही पर पूरी तरह से विराम लग गया है।
क्या था पूरा मामला?
- यह मामला यूपीए (UPA) सरकार के कार्यकाल के दौरान का है, जो हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco Industries) को ओडिशा के तलाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा हुआ था।
- आवंटन के समय कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास ही था।
- आरोप-प्रत्यारोपों और लंबी कानूनी जांच के बाद ट्रायल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री को समन जारी किया था, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और क्लोजर रिपोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा प्रस्तुत की गई क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्यवाही को जारी रखने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने समन को निरस्त करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को हरी झंडी दे दी।
11 साल पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत
शीर्ष अदालत के इस निर्णय के साथ ही कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा यह चर्चित विवाद समाप्त हो गया है। इस फैसले को पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी नैतिक और कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
