महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बड़ा भूचाल: उद्धव ठाकरे को झटका, MLC सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल; उपसभापति पद के लिए भरा नामांकन

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मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक और करारा झटका लगा है। शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने उद्धव गुट का दामन छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का हाथ थाम लिया है।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ की धमक अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है और सचिन अहीर का पाला बदलना इसी का अगला चरण माना जा रहा है।

दलबदल के तुरंत बाद मिला इनाम: उपसभापति पद के उम्मीदवार बने अहीर

सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होते ही पार्टी ने उन्हें बड़ा इनाम भी दे दिया है। शिंदे गुट की ओर से उन्हें विधान परिषद के उपसभापति (Deputy Chairperson) पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया है, जिसके तुरंत बाद सचिन अहीर ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। इस कदम से उद्धव ठाकरे खेमे को विधायी स्तर पर एक और बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’ और क्यों सुरक्षित है बागियों की कुर्सी?

महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी नेताओं को गुपचुप तरीके से अपनी तरफ मिलाने के इस सिलसिले को ‘ऑपरेशन टाइगर’ का कोड नेम दिया गया है।

  • 9 में से 6 सांसदों ने छोड़ा साथ: इससे पहले उद्धव ठाकरे को तब गहरा झटका लगा था जब उनकी पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद अचानक एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए थे।
  • सदस्यता पर खतरा नहीं: दलबदल विरोधी कानून के मुताबिक, अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) जनप्रतिनिधि एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। उद्धव के 9 में से 6 सांसद (यानी पूरे दो-तिहाई) अलग हुए हैं, जिसके चलते तकनीकी रूप से इन सांसदों की कुर्सी फिलहाल सुरक्षित नजर आ रही है।

बिफरे उद्धव ठाकरे, कहा— “बागी सांसदों को तुरंत अयोग्य ठहराएं लोकसभा अध्यक्ष”

इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद उद्धव ठाकरे ने परभणी में आयोजित एक जनसभा में जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की एक बड़ी राजनीतिक साजिश करार देते हुए इसे ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ का नाम दिया और केंद्रीय नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए।

उद्धव ठाकरे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से दल-बदल विरोधी कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने की अपील करते हुए कहा:

अरविंद सावंत को बीच में छोड़ना पड़ा दौरा

उद्धव ठाकरे ने बताया कि उनके वफादार सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र सौंपकर अपना पक्ष रखने का समय मांगा है। मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस केस की सुनवाई की तारीख पहले तय होने के कारण उद्धव गुट के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत को अपना कारगिल का आधिकारिक दौरा बीच में ही छोड़कर मुंबई वापस लौटना पड़ा।

सियासी गलियारों में चर्चा: सचिन अहीर का जाना और तुरंत बाद उपसभापति पद का टिकट मिलना यह साफ करता है कि महायुति और शिंदे गुट उद्धव ठाकरे को पूरी तरह अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि लोकसभा अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की अयोग्यता याचिका पर क्या फैसला लेते हैं।

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