राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: मायावती का पहला बयान आया सामने, कहा— ‘ऐसे लोग कतई बख्शे न जाएं,

Date:

लखनऊ/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, गबन और हेराफेरी के मामले ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्ष के चौतरफा हमले और हंगामे के बीच अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती का भी इस पर पहला बड़ा बयान सामने आया है। मायावती ने आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है, लेकिन साथ ही इस मुद्दे पर हो रही राजनीति को लेकर विपक्षी दलों को नसीहत भी दी है।

‘ऐसे लोग कतई भी बख्शे नहीं जाने चाहिये’ — मायावती

हालाँकि, मायावती ने इस मुद्दे के राजनीतिकरण का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए अयोध्या में देश के अन्य प्रसिद्ध व विख्यात मंदिरों की पारदर्शी व्यवस्था और हिसाब-किताब के तौर-तरीकों (SOP) का अनुसरण किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को नसीहत देते हुए कहा कि “देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये।”

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा, खड़े हो रहे गंभीर सवाल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक्शन का दौर तेजी से जारी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके पास से भारी मात्रा में कैश भी बरामद हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

इस्तीफे के बावजूद दोनों ही पूर्व पदाधिकारी जांच के घेरे में हैं और उन पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं:

1. चंपत राय पर क्यों उठ रही है उंगली?

  • SOP का उल्लंघन और सबूत मिटाने की आशंका: नियमों के मुताबिक राम मंदिर के सीसीटीवी फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाना था, लेकिन इसे महज 45 दिनों में ही डिलीट किया जा रहा था। इससे चोरी से जुड़े कई अहम सबूत नष्ट होने की आशंका है।
  • टिन्नू यादव को खुली छूट: पुलिस जांच में सामने आया है कि चंपत राय ने मंदिर प्रबंधन का सारा काम टिन्नू यादव नाम के व्यक्ति को सौंप रखा था। मंदिर में पुलिस को भी ज्यादा दखल देने की इजाजत नहीं थी।
  • अंधेरे में रहने पर हैरानी: कहा जाता है कि चंपत राय की मर्जी के बिना मंदिर में पत्ता भी नहीं हिलता था, ऐसे में इतने लंबे समय तक करोड़ों के चढ़ावे की चोरी होती रही और उन्हें भनक तक नहीं लगी, इस बात पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, SIT जांच में फिलहाल उनके खिलाफ सीधे सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन उन्हें अभी क्लीन चिट भी नहीं दी गई है।

2. अनिल मिश्रा के रोल पर भी संशय

ट्रस्ट के सदस्य और पेशे से होम्योपैथिक डॉक्टर अनिल मिश्रा (जो चंपत राय के बेहद करीबी माने जाते हैं) पर भी जांच की आंच पहुंच चुकी है।

  • जांच में असहयोग का आरोप: सूत्रों के मुताबिक, अनिल मिश्रा ने SIT जांच में बहुत ज्यादा सहयोग नहीं किया है।
  • प्रॉपर्टी की जांच: फिलहाल जांच एजेंसियां उनके रोल की जांच कर रही हैं, लेकिन उनकी संपत्ति (Property) को लेकर अभी तक पूरी जानकारी साफ नहीं हो पाई है। उनके तीन बेटे हैं, जिनमें से एक का राम मंदिर के पास रेस्टोरेंट है, दूसरा जर्मनी में डॉक्टर है और तीसरा राम मंदिर के पास ही एक अस्पताल में डॉक्टर है।

आगे क्या? राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े इस बड़े घोटाले ने श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। SIT इस मामले की तह तक जाने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच अब यही मांग उठ रही है कि इस महा-घोटाले के पीछे छिपे असली ‘मास्टरमाइंड’ का पर्दाफाश जल्द से जल्द होना चाहिए।

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

राम मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस राजनीतिक एजेंडा चला रही है: भाजपा सांसद कंगना रनौत

नई दिल्ली: भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने...