4 घंटे 30 मिनट में बदला राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण, मीनाक्षी नटराजन ने लगाए गंभीर आरोप

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भोपाल: मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी गलियारों में उस वक्त भारी हलचल मच गई, जब रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो गया है।

BJP के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट के अलावा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल अब बिना किसी मुकाबले के राज्यसभा पहुंचेंगे।

  • क्यों रद्द हुआ नामांकन?

नामांकन प्रक्रिया के दौरान BJP उम्मीदवार महेश केवट और उनकी कानूनी टीम ने मीनाक्षी नटराजन के हलफनामे पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

  • मुख्य आरोप: नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले (2025 का मामला) की जानकारी छिपाई थी।
  • अदालती मामला: हैदराबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक पूर्व पार्षद की शिकायत पर नटराजन (जो वर्तमान में तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी भी हैं) को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया था।
  • करीब साढ़े चार घंटे की लंबी सुनवाई और कानूनी दलीलों के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने BJP की आपत्ति को सही मानते हुए कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा निरस्त कर दिया।
  • यह सीट की चोरी है’ — कांग्रेस का तीखा पलटवार

इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में भारी नाराजगी है और पार्टी ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है:

  • मीनाक्षी नटराजन ने कहा, “जब सदन में पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद BJP ने तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी उनकी मंशा साफ हो गई थी। जो बात पहले ‘वोट चोरी’ तक सीमित थी, वह अब ‘सीट चोरी’ तक पहुंच गई है।”
  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे महिलाओं के अधिकारों पर आघात बताते हुए कहा कि इसके विरोध में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भूख हड़ताल करेंगे।
  • कानूनी कदम: कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने इस आदेश को कानून के खिलाफ बताया। उनका तर्क है कि धारा 223 के तहत मिला नोटिस सिर्फ पक्ष रखने का अवसर था, इसे कोई आपराधिक मामला या संज्ञान नहीं माना जा सकता। पार्टी इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देगी।
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया फैसले का स्वागत

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा:

  • रनवे से वापस लौटा कांग्रेस विधायकों का विमान

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर भी हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। कांग्रेस को चुनाव में क्रॉस-वोटिंग का डर था, जिसके चलते उन्होंने अपने 40 से अधिक विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से बेंगलुरु (कर्नाटक) भेजने की तैयारी कर ली थी।

विमान रनवे पर खड़ा था, लेकिन तकनीकी कारणों और सुरक्षा मंजूरी में देरी की वजह से उसे उड़ान भरने में 4 घंटे लग गए। इसी बीच जैसे ही मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने की खबर आई, विधायकों का बेंगलुरु दौरा रद्द कर दिया गया।

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