रायपुर। झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने अब आगे की रणनीति तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। शनिवार को रायपुर स्थित राजीव भवन में कांग्रेस नेताओं और झीरम कांड से जुड़े पीड़ित परिवारों के साथ बैठक हुई। बैठक में पार्टी ने मामले को लेकर तीन बड़े निर्णय लिए हैं। इनमें कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात, दिल्ली में बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस और आगे न्यायिक लड़ाई लड़ने की तैयारी शामिल है।
दरअसल, 16 सितंबर को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से कहा गया कि मामले में अभी कई सवालों के जवाब बाकी हैं।
दीपक बैज बोले- न्याय नहीं मिला
बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस लगातार यह बात उठा रही है कि NIA का फैसला आया है, लेकिन पीड़ित परिवारों को अभी न्याय नहीं मिला है। उनके मुताबिक, बैठक में पीड़ित परिवारों से चर्चा के दौरान भावुक माहौल रहा और 13 साल बाद भी उनके दर्द का समाधान नहीं हुआ है।
दीपक बैज ने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने आगे की रणनीति तय की है। कांग्रेस अब झीरम मामले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस के तीन बड़े फैसले
बैठक में लिए गए फैसलों के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जल्द ही पार्टी आलाकमान से मुलाकात करेंगे और झीरम मामले में आए फैसले तथा आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
दूसरे फैसले के तहत दिल्ली में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की बात कही गई है। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ झीरम कांड से जुड़े पीड़ित परिवारों को भी शामिल करने की योजना है। कांग्रेस इस दौरान मामले से जुड़े अपने सवालों और पक्ष को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी।
तीसरे फैसले के तहत कांग्रेस ने मामले में आगे न्यायिक लड़ाई लड़ने की तैयारी करने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि इस संबंध में वरिष्ठ नेताओं और पीड़ित परिवारों से चर्चा के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी।
भूपेश बघेल ने NIA जांच पर उठाए सवाल
बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी झीरम मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कवासी लखमा से जुड़े जांच के पहलू का जिक्र करते हुए सवाल किया कि यदि NIA की जांच में कवासी लखमा को लेकर संदेह या सवाल सामने आए थे, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें NIA की जांच पर ही संदेह है। उन्होंने जांच एजेंसियों के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए और NIA की कार्यप्रणाली की तुलना ED और CBI से की। ये भूपेश बघेल के राजनीतिक आरोप और सवाल हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है।
फैसले के बाद कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता
झीरम घाटी हमला 2013 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। करीब 13 साल पुराने इस मामले में सितंबर 2026 में विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
अदालत के फैसले के बाद जहां कांग्रेस ने मामले को लेकर आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा शुरू की है, वहीं पार्टी का कहना है कि झीरम कांड से जुड़े सभी सवालों के जवाब और पीड़ित परिवारों की न्याय संबंधी अपेक्षाएं अभी महत्वपूर्ण विषय हैं।
अब कांग्रेस की नजर आलाकमान के साथ होने वाली चर्चा, दिल्ली में प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर है। इन तीनों कदमों के जरिए पार्टी झीरम मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है।
