दिशा सालियान केस पर संजय राउत का बड़ा बयान, बोले- ठाकरे परिवार को निशाना बनाने की कोशिश

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मुंबई। दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ठाकरे परिवार का बचाव करते हुए दिशा सालियान मामले को लेकर सामने आ रहे आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया है। राउत का कहना है कि ठाकरे परिवार को निशाना बनाने के लिए पुराने मामले को दोबारा राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं, इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच जारी है और जांच एजेंसी अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि दिशा सालियान की मौत को लेकर नए सिरे से लगाए जा रहे आरोपों का उद्देश्य ठाकरे परिवार की छवि को प्रभावित करना है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ 500 करोड़ रुपये की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। रिपोर्टों के अनुसार, सतीश सालियान स्वयं ठाकरे परिवार के बांद्रा स्थित आवास मातोश्री जाकर नोटिस देने की बात कह चुके हैं।

राउत ने आरोप लगाया कि दिशा सालियान मामले को लेकर अचानक तेज हुई राजनीतिक गतिविधियां ठाकरे परिवार के खिलाफ एक सोची-समझी मुहिम का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जब भी ठाकरे परिवार राजनीतिक रूप से सक्रिय या मजबूत होता है, पुराने मामलों को फिर से उठाया जाता है। हालांकि, ये राउत के राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।

दिशा सालियान की जून 2020 में मुंबई में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। हालिया घटनाक्रम में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने मामले में FIR दर्ज की है। जांच में मौत की परिस्थितियों के साथ कथित सबूतों से छेड़छाड़ और अन्य आरोपों से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में FIR में कई लोगों के नाम जांच के संदर्भ में होने की बात कही गई है, लेकिन किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराया जाना उचित नहीं है।

इस पूरे विवाद के बीच आदित्य ठाकरे ने भी दिशा सालियान से किसी तरह की मुलाकात या परिचय से इनकार किया है और अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। वहीं, दिशा के पिता की ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस ने मामले को एक नया कानूनी और राजनीतिक आयाम दे दिया है।

संजय राउत ने बातचीत के दौरान केंद्र सरकार और केंद्रीय संस्थाओं को लेकर भी कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने UPI के जरिए जमा होने वाले पैसे को अमेरिका भेजे जाने और इसे कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय एपस्टीन दस्तावेजों को सार्वजनिक होने से रोकने से जोड़ने का दावा किया। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है और इसे राउत के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

राउत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के सूर्यास्त संबंधी बयान का राजनीतिक संदर्भ में उल्लेख करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2029 से पहले की राजनीतिक स्थिति से जोड़कर देखा। उन्होंने प्रधानमंत्री को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें लेकर की जाने वाली कुछ अतिशयोक्तिपूर्ण तुलना उचित नहीं है। यह भी राउत का राजनीतिक बयान है।

इसके अलावा राउत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उस पर विपक्षी दलों के खिलाफ पक्षपात करने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए चुनावी फैसलों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति जताई। राउत ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के एक उम्मीदवार की गिरफ्तारी और राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न से जुड़े फैसलों का भी जिक्र किया।

फिलहाल दिशा सालियान मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। एक ओर दिशा के पिता की ओर से मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की गई है, वहीं ठाकरे परिवार और उसके समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रहे हैं। CBI की जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष ही यह स्पष्ट करेंगे कि मामले में आगे की कानूनी दिशा क्या होगी।

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