रायपुर। यूजीसी से जुड़े फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर क्षत्रिय करणी सेना ने छत्तीसगढ़ में आंदोलन का शंखनाद किया। संगठन की ओर से रायपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाया गया। आंदोलनकारी राजभवन पहुंचे, जहां राज्यपाल के OSD के माध्यम से मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया।
क्षत्रिय करणी सेना का कहना है कि यह आंदोलन महज एक ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वर्ण समाज के अधिकार, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाने की पहल है। संगठन ने यूजीसी से संबंधित निर्णय को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
राजभवन पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
आंदोलन की शुरुआत के बाद करणी सेना के कार्यकर्ता राजभवन पहुंचे। यहां राज्यपाल के OSD के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर संगठन की मांगों और चिंताओं से अवगत कराया गया। संगठन ने कहा कि यूजीसी से संबंधित निर्णय का असर समाज के युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
करणी सेना ने छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि स्वर्ण समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए यूजीसी से संबंधित निर्णय या कानून को वापस लिया जाए। साथ ही संगठन ने युवाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
आंदोलन को बताया अधिकारों की लड़ाई
क्षत्रिय करणी सेना ने रायपुर में हुए प्रदर्शन को स्वर्ण समाज के हितों के लिए संघर्ष की शुरुआत बताया। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि समाज के युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी आवाज शासन तक पहुंचना जरूरी है। इसी उद्देश्य से आंदोलन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित किया गया।
संगठन ने कहा कि आज का प्रदर्शन केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकार और अवसरों को लेकर अपनी बात मजबूती से रखने का प्रयास है।
मांग नहीं मानी तो तेज होगा आंदोलन
करणी सेना ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा। संगठन के मुताबिक पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन चलाया जाएगा।
अब आंदोलन के बाद सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। वहीं, करणी सेना ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन किए जा सकते हैं।
