काठमांडू/पोखरा:
नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आए भीषण फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 600 के पार पहुंच चुकी है। वहीं, सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल दिन-रात जुटे हुए हैं।
मोर्चरी की क्षमता खत्म: पोखरा एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज और आसपास के अस्पतालों की कुल क्षमता करीब 88 शवों को रखने की है, लेकिन पड़ोसी जिलों (तनहुं, धाडिंग, नवलपरासी) से लगातार लाए जा रहे शवों के कारण मोर्चरी पूरी तरह भर चुकी है।
ड्राई आइस और अस्थायी इंतजाम: शवों को खराब होने से बचाने के लिए प्रशासन ड्राई आइस (Dry Ice), अतिरिक्त एयर कंडीशनर और कम्युनिटी हॉल जैसी खाली इमारतों का इस्तेमाल अस्थायी शवगृह के रूप में कर रहा है।
शनाख्त के लिए QR कोड: कई शवों की स्थिति ऐसी है कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। इसके लिए पुलिस डीएनए (DNA) सैंपल, फिंगरप्रिंट और तस्वीरें सुरक्षित कर रही है। नेपाल पुलिस ने पहचान प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक QR कोड सिस्टम भी जारी किया है, जिससे परिजन अपने लापता लोगों की तस्वीरें और विवरण देख सकें।
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भारत की ओर से राहत कार्य जारी
आपदा की इस घड़ी में भारत ने नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारतीय वायुसेना का C-130 विमान राहत सामग्री, दवाएं और खाद्य सामग्रियां लेकर नेपाल पहुंचा है। इसके अलावा, भारतीय बचाव दल भी प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के कार्य में सहयोग दे रहे हैं।
