नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए यूरेनियम आपूर्ति समझौते को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया जा रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि बीजेपी के नेताओं और समर्थकों को तथ्यों की सही जानकारी हासिल करने के बाद ही ऐसे दावे करने चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी का पूरा इकोसिस्टम इस समझौते को प्रधानमंत्री मोदी का “ब्रेकथ्रू” बताने में जुटा हुआ है,
जबकि वास्तविकता इससे अलग है। रमेश के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की तत्कालीन प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने दिसंबर 2011 में अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी हासिल कर ली थी। यह फैसला 2008 में हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते (Indo-US Civil Nuclear Agreement) के बाद संभव हुआ था।
जयराम रमेश ने कहा कि भारत के लिए यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता यूपीए सरकार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पहल और कूटनीतिक प्रयासों से तैयार हुआ था। उन्होंने दावा किया कि उसी समझौते ने भारत को वैश्विक असैन्य परमाणु सहयोग के नए अवसर उपलब्ध कराए, जिनका लाभ आज भारत को मिल रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बीजेपी के ट्रोल्स, जिनमें उसके कुछ सांसद भी शामिल हैं, उन्हें अपना होमवर्क बेहतर तरीके से करना चाहिए।”
इससे पहले बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा था कि वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर न करने का हवाला देते हुए यूरेनियम देने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच यूरेनियम निर्यात समझौता संभव हो सका। उन्होंने इसे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और रणनीतिक साझेदारी में आए बदलाव का प्रतीक बताया।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की हालिया बैठक के दौरान दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा,
महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें यूरेनियम आपूर्ति को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया, जिससे भारत के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए ऑस्ट्रेलिया से दीर्घकालिक यूरेनियम निर्यात का रास्ता साफ हुआ।
इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां बीजेपी इसे मोदी सरकार की कूटनीतिक सफलता बता रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि इसकी नींव यूपीए सरकार के समय हुए ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौते से पड़ी थी। ऐसे में यूरेनियम समझौते का श्रेय किसे मिलना चाहिए, इसे लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
