शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह ‘अम्मू’ ने एक बड़ा राजनीतिक धमाका करते हुए एलान किया है कि उनकी पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव में 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। शाहजहांपुर में आयोजित करणी सेना के एक सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे सूरजपाल अम्मू के तेवर पूरी तरह से बगावती नजर आए, जो आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
- हम किसी के गुलाम नहीं, सत्ता में चाहिए भागीदारी
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सूरजपाल सिंह अम्मू ने साफ शब्दों में कहा, “हम माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मान करते हैं, लेकिन हम भाजपा के गुलाम नहीं हैं। जब राजभर जैसे नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है और ‘अपना दल’ जैसे दलों को सीटें दी जा सकती हैं, तो करणी सेना क्यों नहीं लड़ सकती? हमारे साथ बनिया, ब्राह्मण, क्षत्रिय समेत कई बिरादरियों के लोग खड़े हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि संगठन अब उत्तर प्रदेश की सत्ता में अपनी सीधी भागीदारी चाहता है। हालांकि, इससे पहले रविवार को उन्होंने बीजेपी से 25 टिकटों की मांग की थी, लेकिन सोमवार को उन्होंने स्वतंत्र रूप से 50 सीटों पर चुनाव लड़ने की बड़ी घोषणा कर दी।
करणी सेना की मुख्य मांगें
- गाय को घोषित किया जाए ‘राष्ट्र माता’: सूरजपाल अम्मू ने कहा कि मुस्लिम भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं। हमारे पूर्वजों के समय से गाय को माता माना गया है, इसलिए सरकार को तुरंत गाय को राष्ट्र माता घोषित करना चाहिए।
- शाहजहांपुर का नाम बदलने की मांग: उन्होंने मंच से स्थानीय विधायक अरविंद सिंह से कहा कि वे शाहजहांपुर जिले का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार को एक आधिकारिक प्रस्ताव भेजें।
- ‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा: समाज को एकजुट रहने का संदेश देते हुए अम्मू ने कहा कि देश की माटी से प्रेम करने वाले इस संगठन में सिर्फ क्षत्रिय ही नहीं, बल्कि ब्राह्मण और वैश्य समेत सभी जातियां शामिल हैं। अगर हम एकजुट नहीं रहे, तो हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
बीजेपी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मुख्य रूप से क्षत्रिय और सवर्ण समुदाय के अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए काम करने वाली करणी सेना का यह राजनीतिक कदम यूपी चुनाव के समीकरणों को बदल सकता है। सवर्ण मतदाताओं पर मजबूत पकड़ रखने वाली करणी सेना अगर अपने दम पर 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारती है, तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक को हो सकता है।
