वाशिंगटन:
अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से एक कड़ा और द्विदलीय (bipartisan) कानून पास किया है। इस विधेयक को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम दिया गया है। सीनेट में यह बिल 86-11 के भारी बहुमत से पारित हुआ है।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर वित्तीय दबाव बनाकर उसे यूक्रेन युद्ध के लिए मिल रहे राजस्व को रोकना है।
विधेयक के मुख्य बिंदु:
- 100% तक भारी टैरिफ: इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वे रूस और ईरान से तेल और गैस का बड़ा आयात करने वाले शीर्ष 5 देशों के सामानों पर 100% तक का आयात शुल्क (Tariff) लगा सकते हैं।
- राष्ट्रपति को विशेष छूट अधिकार: विधेयक में यह प्रावधान भी शामिल है कि अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय हित (National Interest) को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश को इस टैरिफ से छूट (Waiver) दे सकते हैं।
- ईरान पर प्रतिबंध का विस्तार: इसके अलावा, यह बिल ‘ईरान सैंक्शंस एक्ट ऑफ 1996’ की समय-सीमा को 2031 तक बढ़ाता है, जिससे ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
भारत पर क्या होगा इसका असर?
रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल भारत पर इस प्रस्तावित कानून के तहत कड़ी नजर रखी जाएगी।
- तुरंत लागू नहीं होगा टैरिफ: विशेषज्ञों के मुताबिक, यह टैरिफ तुरंत प्रभाव से लागू नहीं होगा।
- रणनीतिक संबंधों का ध्यान: अमेरिका भारत पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संबंधों को प्राथमिकता देगा।
- भारतीय निर्यात पर संभावित खतरा: यदि भविष्य में यह टैरिफ लागू किया जाता है, तो अमेरिका को भेजे जाने वाले भारतीय उत्पादों जैसे फार्मास्युटिकल्स, ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स के व्यापार पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
आगे का रास्ता
सीनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अब यह विधेयक अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। वहां से पास होने के बाद ही यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम हस्ताक्षर और कानून बनने के लिए पहुंचेगा।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
