नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा जिले में भीषण हिमस्खलन और मलबे के कारण नदी का प्राकृतिक रास्ता बाधित हो गया है। इसके चलते इलाके में 19 हेक्टेयर और 11 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली दो बड़ी झीलें बन गई हैं। इन झीलों को लेकर भारत में भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इनके अचानक टूटने की स्थिति में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
ISRO के सैटेलाइट विश्लेषण से सामने आई जानकारी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के सैटेलाइट विश्लेषण में इन कृत्रिम रूप से बनी झीलों की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन से आया मलबा नदी के प्रवाह में बाधा बनने के कारण पानी जमा होकर इन झीलों का रूप ले चुका है।
विशेषज्ञों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि प्राकृतिक बांध किसी कारण से टूटता है, तो जमा पानी अचानक नीचे की ओर तेजी से बह सकता है।
कोसी और गंडक नदी क्षेत्र में बढ़ सकता है खतरा
झीलों के अचानक टूटने की स्थिति में कोसी और गंडक नदी प्रणालियों में पानी का प्रवाह तेजी से बढ़ने की आशंका है। इसका असर नेपाल के अलावा भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
खास तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में नदी किनारे बसे इलाकों की निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन और एजेंसियों की बढ़ी चिंता
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद बने इन जलाशयों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य तकनीकी माध्यमों से झीलों के आकार, जलस्तर और आसपास के क्षेत्र में हो रहे बदलाव पर नजर रखी जा सकती है।
हालांकि, झीलों के टूटने की आशंका को लेकर स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी है। संभावित खतरे को देखते हुए नेपाल और भारत के संबंधित प्रशासनिक एवं आपदा प्रबंधन तंत्र के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
