मुंबई:
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। वैश्विक तनाव और कमजोर तिमाही नतीजों के कारण शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए।
सोमवार को बाजार खुलते ही बीएसई (BSE) सेंसेक्स 650 से अधिक अंक टूट गया, वहीं एनएसई (NSE) निफ्टी भी 24,200 के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के नीचे फिसल गया।
बाजार में भारी गिरावट के 3 मुख्य कारण
- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव:
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) ने दुनिया भर के बाजारों का मूड बिगाड़ दिया है। युद्ध के बढ़ते खतरे से निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है।
कच्चे तेल में उबाल ($90 के पार):
मध्य पूर्व में जारी अशांति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड क्रूड (Crude Oil) की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश में महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
- बैंकों के कमजोर नतीजे और मुनाफावसूली:
हाल ही में आए कुछ बड़े बैंकों के पहली तिमाही (Q1) के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। इसके चलते आईटी, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर्स के शेयरों में चौतरफा मुनाफावसूली (Profit Booking) देखने को मिली, जिसने सूचकांक को और नीचे धकेल दिया।
- इन शेयरों पर दिखा सबसे ज्यादा असर
सत्र के दौरान बैंकिंग और ऑटो क्षेत्र के दिग्गजों जैसे एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक बैंक और मारुति में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती और वैश्विक मोर्चे पर तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर रणनीति बनाने की सलाह दी जा रही है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
