नई दिल्ली / भोपाल मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी और कानूनी पारा चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद अब यह लड़ाई सड़क से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत (सु्रीम कोर्ट) तक पहुंच चुकी है। निर्वाचन आयोग (EC) के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जहां इस मामले पर बेहद अहम सुनवाई शुरू हो गई है।
- क्या है पूरा विवाद?
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख (11 जून) तक चले नाटकीय घटनाक्रम में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी।
नटराजन का नामांकन रद्द होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार महेश केवट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया, जिससे कांग्रेस खेमे में भारी नाराजगी है।
- सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस: सिंघवी की दलीलें
सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की ओर से दिग्गज वकील और वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट में हुई मुख्य बहस इस प्रकार रही:
- आरोप तय नहीं हुए: सिंघवी ने दलील दी कि जिस केस का हवाला दिया जा रहा है, वह एक निजी शिकायत है। कोर्ट ने सिर्फ नोटिस जारी किया है, समन जारी करने को संज्ञान लेना नहीं माना जा सकता। जब तक आरोप (Charges) तय न हों, तब तक उम्मीदवार के लिए घोषणा करना अनिवार्य नहीं है।
- लेवल प्लेइंग फील्ड खत्म किया: सिंघवी ने ‘इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण’ केस का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव में सबको समान अवसर (Level Playing Field) मिलना चाहिए। इस फैसले से चुनावी प्रतिस्पर्धा को ही खत्म कर दिया गया।
- चुनाव आयोग पर सवाल: उन्होंने कहा कि वे चुनाव आयोग के पास गए और एक घंटे तक दलीलें दीं, लेकिन संविधान के संरक्षक का इस मामले पर चुप रहना निंदनीय है।
- “कोई जानकारी नहीं छिपाई” — मीनाक्षी नटराजन
इस पूरे विवाद पर खुद मीनाक्षी नटराजन ने मीडिया से बात करते हुए अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा:
- सड़क पर उतरने की तैयारी: राष्ट्रपति भवन तक मार्च!
कानूनी लड़ाई के साथ-साथ कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी भुनाने की तैयारी में है।
- राष्ट्रपति से मांगा वक्त: कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है।
- विधायकों का मार्च: मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक इस फैसले के विरोध में आज दिल्ली में राष्ट्रपति भवन तक मार्च कर सकते हैं। कांग्रेस की मांग थी कि जब तक अदालत का फैसला न आ जाए, तब तक बीजेपी उम्मीदवारों को विजयी घोषित न किया जाए।
आगे क्या?
यदि सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन को राहत मिलती है, तो मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया में एक नया मोड़ आ सकता है। वहीं, अगर अदालत इस फैसले को बरकरार रखती है, तो यह मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका साबित होगा।
