विपक्षी राजनीति में बड़े ‘महाविलय’ की सुगबुगाहट: क्या कांग्रेस की छतरी के नीचे दोबारा आएंगे ममता और शरद पवार?

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नई दिल्ली / मुंबई: लोकसभा चुनावों के बाद देश की राजनीति में एक बहुत बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष को और अधिक मजबूत करने के लिए अब इंडिया (INDIA) गठबंधन के भीतर एक बड़े ‘महाविलय’ की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा है कि कांग्रेस से अलग होकर क्षेत्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने वाले दल—विशेषकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – शरदचंद्र पवार)—एक बार फिर पुरानी कांग्रेस की छतरी के नीचे लौट सकते हैं।

इस संभावित विलय को लेकर कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और एनसीपी (SP) के शीर्ष नेताओं की हालिया बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि पर्दे के पीछे एक बड़ी राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है।

1. अशोक गहलोत की दोटूक: “राहुल गांधी को नेता मानकर घर वापसी करें सभी दल”

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर खुलकर इस विचार का समर्थन किया है।

2. नाना पटोले का दावा: “ममता बनर्जी और पवार विलय की मानसिकता बना रहे हैं”

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने भी इस चर्चा को हवा दी है। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति और संवैधानिक व्यवस्था को बचाने के लिए वोटों का बिखराव रोकना बेहद जरूरी है।

  • संकेत: तृणमूल कांग्रेस (TMC) हो या शरद पवार की पार्टी, सभी में अब कांग्रेस के साथ आने और विलय करने की मानसिकता व भाव देखने को मिल रहा है।
  • स्थिति: हालांकि पटोले ने यह साफ किया कि कांग्रेस ने खुद किसी को ऐसा कोई ऑफिशियल ऑफर नहीं दिया है, बल्कि यह समय की मांग को देखते हुए क्षेत्रीय दलों के भीतर से उठ रही आवाज है।

3. संजय राउत का सुझाव: “शरद पवार संभालें महाविलय की कमान”

शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस पूरी कवायद के लिए एनसीपी प्रमुख शरद पवार के नाम को आगे बढ़ाया है। राउत का मानना है कि जो नेता कभी कांग्रेस की विचारधारा का हिस्सा रहे हैं, उन्हें एक मंच पर लाने में पवार साहब को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। यदि कांग्रेस की मूल विचारधारा वाले सभी दल एकजुट हो गए, तो यह सत्तापक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

(हालांकि, इस बयान पर विरोधी खेमे यानी शिंदे गुट के मंत्री संजय शिरसाट ने तंज कसते हुए कहा कि संजय राउत यह तय करने वाले कोई नहीं होते कि किसे कांग्रेस में जाना चाहिए, उन्हें अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए।)

4. सुप्रिया सुले का सस्पेंस: “पहले बारिश तो होने दो, फिर देखेंगे छतरी लेनी है या रेनकोट”

इस संभावित विलय और सोनिया गांधी-ममता बनर्जी की मुलाकात के दावों पर जब शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले से सीधे सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। सुप्रिया ने कहा:

हालांकि, उन्होंने संजय राउत के सुझावों का सम्मान किया और ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा कि राजनीति में कोई कभी खत्म नहीं होता और ममता जी की विचारधारा को कोई समाप्त नहीं कर सकता।

क्यों तेज हुई विलय की चर्चा?

विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में आंतरिक उथल-पुथल की खबरों और दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की हालिया बैठकों के बाद से विपक्षी खेमे में यह महसूस किया जा रहा है कि बीजेपी का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर केवल एक मजबूत कांग्रेस ही विकल्प हो सकती है। यही वजह है कि क्षेत्रीय ताकतों को अब कांग्रेस में समाहित करने की रणनीति पर विचार शुरू हो गया है।

अब देखना यह होगा कि यह सिर्फ नेताओं की बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में देश की राजनीति को एक नया ‘महाकांग्रेस’ रूप देखने को मिलता है।

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