नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर के कथित दान घोटाले को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मामले में बड़े स्तर की संलिप्तता की आशंका जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रियंका गांधी ने लिखा, “यह सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण है कि क्या सिर्फ छोटे स्तर के कर्मचारी अपने दम पर सीसीटीवी कैमरे बंद कर सकते हैं और हजारों करोड़ रुपये के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं, या इसके पीछे कुछ बड़े खिलाड़ियों की मिलीभगत है?”
उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के नाम पर लीपापोती नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए। साथ ही, आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर गंभीर चोट बताया।
ट्रस्ट के दो बड़े अधिकारियों का इस्तीफा
विवाद के बीच शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर इस कथित घोटाले को लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव समेत कुछ अन्य लोगों को नामजद किया गया है।
अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के दान में करीब 7.5 करोड़ से 27 करोड़ रुपये तक की कथित हेराफेरी हुई है।
मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। यह जांच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर शुरू की गई और फिलहाल जांच जारी है।
