चेन्नई/नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में एक नई नियुक्ति को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की सांसद कनिमोझी ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए नई दिल्ली में राज्य के विशेष प्रतिनिधि (Special Representative) के रूप में के. वेंकट नारायणन की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने योग्यता के बजाय करीबी संबंधों को प्राथमिकता दी है।
- कनिमोझी ने सरकार से पूछे दो बड़े सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कनिमोझी ने पूछा कि क्या TVK या पूरे तमिलनाडु में इस अहम पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए एक भी योग्य व्यक्ति नहीं था। उन्होंने कहा कि यह पद मंत्री स्तर के बराबर माना जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के सामने तमिलनाडु के अधिकारों और हितों की मजबूती से पैरवी करना है।
उन्होंने दूसरा सवाल मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर उठाया। कनिमोझी ने पूछा कि यदि भविष्य में तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे सामने आते हैं, तो क्या नवनियुक्त प्रतिनिधि तमिलनाडु के हितों की रक्षा करेंगे या अपने गृह राज्य कर्नाटक के पक्ष में खड़े होंगे?
- आखिर क्यों हो रहा है विवाद?
दरअसल, के. वेंकट नारायणन मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं और वह KVN प्रोडक्शंस के चेयरमैन हैं। यही प्रोडक्शन हाउस मुख्यमंत्री विजय की आगामी फिल्म ‘जन नायकन’ का सह-निर्माता भी है। इसी वजह से विपक्ष इस नियुक्ति को लेकर हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप लगा रहा है।
- बीजेपी ने भी साधा निशाना
इस मुद्दे पर केवल DMK ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु बीजेपी ने भी विजय सरकार को घेरा है। प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे तमिलनाडु के हितों के साथ बड़ा विश्वासघात बताया और सरकार से नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
- सरकार ने दी सफाई
बढ़ते विवाद के बीच तमिलनाडु सरकार ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि के. वेंकट नारायणन की नियुक्ति पूरी तरह अस्थायी (Temporary) है। सरकार के मुताबिक, वह पदभार ग्रहण करने के बाद केवल सीमित अवधि तक ही इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
- बढ़ सकता है सियासी घमासान
कनिमोझी के सवालों और बीजेपी के विरोध के बाद यह मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस विवाद का आगे किस तरह जवाब देती है और विपक्ष के आरोपों का क्या असर पड़ता है।
