CBSE मामले में मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर

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नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़े विवाद को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद और उससे जुड़े निर्णयों को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने CBSE चेयरमैन Rahul Singh और सचिव Himanshu Gupta का ट्रांसफर कर दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन भी किया गया है।

  • संसद की स्थायी समिति में अधिकारियों से हुई कड़ी पूछताछ

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति की बैठक में CBSE चेयरमैन और स्कूल एजुकेशन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की गई। समिति के अध्यक्ष Digvijaya Singh ने नई मूल्यांकन प्रक्रिया को लागू करने में दिखाई गई जल्दबाजी पर सवाल उठाए।

उन्होंने पूछा कि जब नई प्रणाली को लागू करने के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं थी, तो इसे जल्दबाजी में लागू करने की आवश्यकता क्या थी। समिति ने यह भी जानना चाहा कि क्या इस प्रक्रिया को एक वर्ष बाद बेहतर तैयारी और परीक्षण के साथ लागू नहीं किया जा सकता था। बैठक के दौरान छात्रों के हितों और मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई।

  • बैठक में छात्र ने भी उठाए महत्वपूर्ण सवाल

इस बैठक की एक विशेष बात यह रही कि इसमें एक छात्र को भी आमंत्रित किया गया था। छात्र ने अधिकारियों के सामने मूल्यांकन प्रक्रिया और तकनीकी खामियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। सूत्रों के अनुसार, छात्र द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और सवालों ने बैठक में मौजूद सदस्यों का ध्यान आकर्षित किया।

बैठक के दौरान भाजपा सांसद Bhim Singh ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अधिकारियों को व्यवस्था संभालने में कठिनाई हो रही है, तो इस छात्र को ही सहायक बना लेना चाहिए क्योंकि वह कई महत्वपूर्ण कमियों की ओर ध्यान दिलाने में सफल रहा है।

  • जांच समिति करेगी पूरे मामले की पड़ताल

सरकार द्वारा गठित जांच समिति अब ऑन-स्क्रीन मार्किंग सेवाओं की खरीद प्रक्रिया, ठेका आवंटन, तकनीकी तैयारियों, प्रशिक्षण व्यवस्था और मूल्यांकन प्रणाली के क्रियान्वयन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जा सकती है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि CBSE जैसे देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड में किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।

  • छात्रों और अभिभावकों की नजर जांच रिपोर्ट पर

CBSE के इस मामले ने देशभर के लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि नई मूल्यांकन प्रक्रिया में कहां-कहां कमियां रहीं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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