बेंगलुरु
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अवैध प्रवासियों से जुड़े एक संवेदनशील मामले में बेंगलुरु पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) का मुख्य कर्तव्य नियमों और कानूनों का सख्ती से पालन कराना है, न कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बरतना।
पुलिस की मदद करने वाले डॉक्टर पर ही दर्ज कर दी एफआईआर
यह पूरा मामला एक स्थानीय डॉक्टर द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता डॉक्टर का आरोप है कि उन्होंने एक संदिग्ध अवैध विदेशी नागरिक की पहचान करने में पुलिस की नागरिक के तौर पर मदद की थी। हालांकि, सहयोग करने के बदले पुलिस ने उल्टा उन्हीं के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर दी। डॉक्टर ने इसे पुलिस द्वारा की गई बदले की कार्रवाई (Malafide Action) करार देते हुए अदालत से एफआईआर को रद्द करने की गुहार लगाई है।
“कानून का पालन कराना पुलिस की जिम्मेदारी”
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने पुलिस की भूमिका और रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए। अदालत ने टिप्पणी की कि जब आम नागरिक कानून व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देने में प्रशासन का सहयोग करते हैं, तो उनके साथ इस तरह का व्यवहार एजेंसियों की साख और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अदालत इस मामले में याचिकाकर्ता की राहत और पुलिस की कार्रवाई की वैधानिकता पर आगे की सुनवाई कर रही है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
