अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर चल रही जांच ने नया मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) अब केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि चढ़ावे के संग्रहण, सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन की पूरी व्यवस्था की भी गहन समीक्षा कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दानपात्रों से प्राप्त नकदी, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के संग्रहण से लेकर उनके आधिकारिक रिकॉर्ड और बैंक जमा प्रक्रिया तक सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप थीं या नहीं। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल डेटा, बैंकिंग दस्तावेजों और प्रशासनिक रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, एसआईटी अब तक मंदिर प्रशासन, सेवादारों और चढ़ावे की गणना से जुड़े 60 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। कई व्यक्तियों को दोबारा बुलाकर उनके बयानों का सत्यापन किया जा रहा है, ताकि जांच में किसी भी प्रकार की विसंगति न रह जाए।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू मंदिर में प्राप्त बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा और उनके दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और सुदृढ़ निगरानी तंत्र की आवश्यकता होती है।
इस मामले ने राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है। विपक्ष जहां निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग कर रहा है, वहीं सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान प्रबंधन प्रणाली में कोई चूक हुई थी या नहीं।
