बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत आरक्षित सीटों और उनमें दाखिला लेने वाले बच्चों का सही रिकॉर्ड पेश नहीं किए जाने पर राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य शासन को सभी स्कूलों का सही, पूर्ण और सत्यापित रिकॉर्ड अगली सुनवाई में पेश करने का अंतिम अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी।
बड़े स्कूलों में RTE सीटों के आंकड़ों पर उठे सवाल
यह मामला भगवंत की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने शासन द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। बताया गया कि कुछ बड़े निजी स्कूलों में RTE के तहत आरक्षित सीटों की संख्या शून्य या बेहद कम बताई गई है, जबकि रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति को लेकर आपत्ति जताई गई है।
दरअसल, हाईकोर्ट ने इससे पहले भी राज्य सरकार से प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत आरक्षित सीटों, दाखिल बच्चों और खाली सीटों का पूरा ब्योरा मांगा था। 8 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने सरकार को सभी स्कूलों का विस्तृत चार्ट और संबंधित रिकॉर्ड हलफनामे के साथ पेश करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने रिकॉर्ड को लेकर जताई सख्त नाराजगी
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने टिप्पणी की कि “कोर्ट के साथ इस तरह मजाक नहीं किया जाना चाहिए।” कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्ष 2016 में दिए गए निर्देशों के बावजूद उनका उचित अनुपालन नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट ने अब राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में RTE के तहत आरक्षित सीटों, दाखिले और खाली सीटों का सही तथा सत्यापित डेटा अगली सुनवाई में पेश किया जाए।
18 नवंबर तक सही डेटा नहीं आया तो कार्रवाई
हाईकोर्ट ने राज्य शासन को रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए 18 नवंबर तक का अंतिम अवसर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि तय समयसीमा तक सभी स्कूलों का सही डेटा अदालत के सामने पेश नहीं किया जाता है तो शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 311 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अब शिक्षा विभाग के सामने सभी स्कूलों के RTE रिकॉर्ड को दोबारा सत्यापित कर अदालत के निर्देश के मुताबिक पूरा डेटा पेश करने की चुनौती है। मामले की अगली सुनवाई में सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा।
RTE सीटों का सही रिकॉर्ड क्यों है जरूरी?
RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत निजी स्कूलों में वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए प्रवेश का प्रावधान है। ऐसे में आरक्षित सीटों, दाखिले और खाली सीटों का सही रिकॉर्ड होना जरूरी है। हाईकोर्ट इसी व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार से लगातार जानकारी मांग रहा है।
अब देखना होगा कि 18 नवंबर की सुनवाई से पहले राज्य सरकार सभी स्कूलों का सही और सत्यापित रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश कर पाती है या नहीं।
