सुकमा:
छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्र सुकमा में ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। इस विशेष अभियान के माध्यम से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता में बड़ा सुधार आया है, जिससे विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं (Maternal and Child Healthcare) को एक नई दिशा और रफ्तार मिली है।
राज्य सरकार की इस पहल से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच पा रही हैं।
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मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में आए बड़े बदलाव
- सुरक्षित प्रसव और संस्थागत डिलीवरी को बढ़ावा: अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान और समय पर अस्पताल में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा रहा है।
- कुपोषण के खिलाफ प्रभावी जंग: बच्चों और धात्री माताओं के पोषण स्तर को सुधारने के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और आवश्यक न्यूट्रिशन किट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- घर-घर तक स्वास्थ्य जांच: दूर-दराज़ के गाँवों और पोटाकेबिनों तक मोबाइल मेडिकल टीमों के जरिए एनीमिया (खून की कमी), टीबी और अन्य बीमारियों की समय पर पहचान कर इलाज किया जा रहा है।
ग्रामीणों और महिलाओं को मिल रहा सीधा लाभ
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी से सुकमा जिले के दुर्गम इलाकों में भी अब लोग बेझिझक अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को समय पर टीकाकरण और संस्थागत प्रसव की सुविधा मिलने से शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में सफलता मिल रही है।
स्वास्थ्य विभाग का रुख: जिला प्रशासन का कहना है कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ का मुख्य उद्देश्य सुकमा के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जिससे क्षेत्र के बच्चे और महिलाएं स्वस्थ एवं समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ सकें।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
