रायपुर:
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन का माहौल उस समय बेहद गरमा गया,
जब राजधानी रायपुर में गहराते पेयजल संकट और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ का मुद्दा उठा।
हैरान करने वाली बात यह रही कि इस संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष (भाजपा) के ही दिग्गज विधायकों ने अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा किया, जिसके बाद उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव को मोर्चा संभालना पड़ा।
सत्ता पक्ष के विधायकों की ‘अपनों’ से ही तीखी तकरार
प्रश्नकाल के दौरान रायपुर के पेयजल संकट और पाइपलाइन के विस्तार को लेकर सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए:
- करोड़ों खर्च, फिर भी टैंकरों का सहारा (विधायक सुनील सोनी):
- पूर्व महापौर और विधायक सुनील सोनी ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि रायपुर के जिन इलाकों में जल टंकियों का निर्माण पूरा हो चुका है, वहां सबसे ज्यादा पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब योजना पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके हैं, तो लोगों को नियमित पेयजल के लिए तरसना क्यों पड़ रहा है?
- 24 घंटे पानी का दावा हवा, 90 हजार अवैध कनेक्शन (विधायक राजेश मूणत):
- पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक राजेश मूणत ने पूछा कि रायपुरवासियों को घर-घर नियमित पेयजल की आपूर्ति आखिर कब तक शुरू होगी?
- उन्होंने खुलासा किया कि शहर के तीन प्रमुख वार्डों में 24 घंटे जलापूर्ति के लिए दोबारा पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। मूणत ने दावा किया कि रायपुर शहर में लगभग 90,000 अवैध पानी के कनेक्शन हैं, जो पूरी जलापूर्ति व्यवस्था को ठप कर रहे हैं।
डिप्टी सीएम अरुण साव का जवाब: “जल्द तैयार होगी व्यापक कार्ययोजना”
विधायकों की नाराजगी और तीखे सवालों के बीच घिरे उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्थिति को संभालते हुए सदन को शांत करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा:
- प्रदेश के सभी नगरीय निकायों से जल जीवन मिशन और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी विस्तृत और जमीनी रिपोर्ट मांगी गई है।
- अवैध कनेक्शनों और तकनीकी खामियों की जांच कराई जाएगी।
- रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही एक ‘मास्टर एक्शन प्लान’ (व्यापक कार्ययोजना) तैयार की जाएगी, जिससे रायपुर समेत पूरे प्रदेश में सुचारू और नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
क्यों खास है यह बहस?
लोकतंत्र की यह खूबसूरत तस्वीर छत्तीसगढ़ विधानसभा में देखने को मिली, जहां सरकार में शामिल विधायकों ने ही जनहित के मुद्दे पर मंत्रियों से तीखे सवाल पूछने में संकोच नहीं किया।
जल जीवन मिशन में हो रही देरी और राजधानी में गर्मी के मौसम में पीने के पानी की किल्लत को लेकर उपजे इस असंतोष ने यह साफ कर दिया है कि पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करना सरकार के लिए अब सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।
