रायपुर। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से कथित तौर पर करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले में अब जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच एजेंसी CBI के पास पहुंच गई है। CBI जांच शुरू होने के बाद इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI जांच का स्वागत करते हुए कहा कि अब मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने CBI को जांच सौंपे जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
CM साय बोले- अब दूध का दूध और पानी का पानी होगा
BSP स्क्रैप चोरी मामले में CBI जांच को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मामले की जांच अब केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है। उनके मुताबिक, CBI की जांच से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी मामले की व्यापक जांच की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रकरण में पहले से पुलिस की जांच चल रही थी और जांच के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। लगातार व्यापक जांच की मांग सामने आने के बाद मामले को CBI को सौंपा गया है।
दीपक बैज ने CBI जांच पर उठाए सवाल
वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने CBI जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य की पुलिस इस मामले की जांच करने में सक्षम नहीं थी। बैज ने आरोप लगाया कि स्क्रैप चोरी का मामला बड़ा है और इसमें कुछ नेताओं की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं।
बैज ने यह भी सवाल किया कि CBI की जांच में उन लोगों को भी पूछताछ के दायरे में लिया जाएगा या नहीं, जिनके नाम मामले को लेकर सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को आगे बढ़ाने के बजाय CBI को जांच सौंपने से इसे लंबा खींचने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इन पर जांच एजेंसी की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
क्या है BSP स्क्रैप चोरी का मामला?
मामला 26 मई 2026 को सामने आया था। पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स और हथखोज के प्लॉट नंबर-18 में कार्रवाई की थी। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान कई हाईवा, ट्रक और अन्य वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री मिली थी।
कार्रवाई के दौरान करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा स्क्रैप की लोडिंग और ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले वाहन, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य मशीनें भी जब्त की गई थीं। जब्त सामान और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसमें लगभग 90 लाख रुपये के लौह स्क्रैप का अनुमान बताया गया था।
पुलिस जांच में कई गिरफ्तारियां
मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। इनमें संजय सिंह समेत कुछ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि कुछ कारोबारियों ने अग्रिम जमानत भी हासिल की है।
अब CBI के हाथ में जांच आने के बाद मामले से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, जब्त सामग्री, लेन-देन और आरोपियों से जुड़े दस्तावेजों की नए सिरे से जांच की जा सकती है। CBI जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उस दिशा में भी कार्रवाई हो सकती है।
CBI जांच से आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर CBI की जांच पर है। एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और पहले हुई पुलिस कार्रवाई के रिकॉर्ड की पड़ताल करेगी। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि स्क्रैप चोरी का पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित हो रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी। फिलहाल मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच CBI की जांच के नतीजों का इंतजार है।
