नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर देश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। सम्मेलन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने BRICS Summit को भारत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए इसके जरिए निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई, वहीं कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सम्मेलन की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए इसे महज एक ‘तमाशा’ करार दिया है।
केशव मौर्य बोले- भारत के लिए गौरव का क्षण
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने BRICS Summit को भारत के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से भारत की वैश्विक छवि मजबूत होती है और देश में निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं।
मौर्य ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। उनके मुताबिक, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का लाभ देश की अर्थव्यवस्था और युवाओं को मिल सकता है।
बिहार के मखाने की वैश्विक पहचान से खुश दिलीप जायसवाल
वहीं, बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने BRICS Summit के दौरान बिहार के मखाने को मिल रही वैश्विक पहचान पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार के प्रमुख उत्पादों की चर्चा होना राज्य के लिए गौरव की बात है।
मखाने को वैश्विक बाजार से जोड़ने और बिहार के किसानों तथा उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
राशिद अल्वी ने BRICS Summit पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने BRICS Summit को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सम्मेलन को महज एक ‘तमाशा’ बताते हुए कहा कि आयोजन की सुरक्षा पर भारी खर्च किया जा रहा है, लेकिन इससे भारत के हित में कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है।
अल्वी ने सम्मेलन की उपलब्धियों और उससे देश को होने वाले वास्तविक लाभ पर सवाल उठाते हुए सरकार से ठोस परिणाम सामने रखने की मांग की।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के दावों में अंतर
BRICS Summit को लेकर सामने आ रही इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आयोजित इस बड़े सम्मेलन का राजनीतिक असर भी दिखाई दे रहा है। सत्ता पक्ष जहां इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत, निवेश और रोजगार के अवसरों से जोड़कर देख रहा है, वहीं विपक्ष सम्मेलन के खर्च और उसके वास्तविक परिणामों को लेकर सवाल उठा रहा है।
अब सम्मेलन के समापन के बाद सामने आने वाले फैसलों और समझौतों पर सभी की नजर रहेगी। यही तय करेगा कि BRICS Summit 2026 भारत के लिए किस हद तक आर्थिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होता है।
