नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने (बेदखली) का नोटिस दिए जाने पर पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया है। ‘आउटलुक’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इस आदेश को सुनने के बाद उन्हें ऐसा लगा, जैसे उन्हें उनके अपने ही घर से बेदखल किया जा रहा हो।
27.3 एकड़ में फैले इस ऐतिहासिक क्लब के साथ किरण बेदी का रिश्ता दशकों पुराना है। उन्होंने क्लब से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
अमृतसर से दिल्ली और जिमखाना क्लब का सफर
किरण बेदी ने बताया कि इस क्लब से उनका नाता तब से है जब वह महज 14 साल की थीं:
शुरुआती यादें: वह टेनिस टूर्नामेंट खेलने के लिए अमृतसर से दिल्ली आया करती थीं। इसी क्लब की वजह से उन्हें दिल्ली से प्यार हुआ और उन्होंने यहीं रहने व काम करने का सपना देखा।
पहली पोस्टिंग का कनेक्शन: जब 24 साल की उम्र में उन्हें चाणक्यपुरी की असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) और सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर के रूप में पहली पोस्टिंग मिली, तब जिमखाना क्लब उन्हीं के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा था।
दिग्गजों की गवाह रही है यह जगह
किरण बेदी के अनुसार, दिल्ली जिमखाना क्लब भारत के इतिहास, आधुनिकता और विरासत का प्रतीक रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैच: दिल्ली लॉन टेनिस एसोसिएशन (DLTA) कॉम्प्लेक्स बनने से पहले, सभी बड़े अंतरराष्ट्रीय मैच और डेविस कप यहीं आयोजित होते थे। यहाँ एशिया के सबसे बेहतरीन लॉन टेनिस कोर्ट हैं।
महान खिलाड़ियों को खेलते देखा: उन्होंने यहाँ रामनाथन कृष्णन, जयदीप मुखर्जी, अमृतराज भाई, निरुपमा मांकड़ और सुसान दास जैसे दिग्गज टेनिस खिलाड़ियों को खेलते हुए देखा है।
बुजुर्गों का दूसरा घर और शानदार सुविधाएं
क्लब की खूबियों और सामाजिक महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा:
बुजुर्गों के लिए सहारा: क्लब के लॉन कई बुजुर्ग सदस्यों के लिए ‘दूसरा घर’ बन चुके हैं, जहाँ वे सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं। यहाँ 100 साल पुराना ढका हुआ स्विमिंग पूल है, जहाँ लोग रोजाना फिटनेस के लिए आते हैं।
विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर: क्लब में स्क्वैश कोर्ट (जिसने कई नेशनल चैंपियन दिए), जिम, एक बेहतरीन लाइब्रेरी और रीडिंग रूम जैसी सुविधाएं हैं। पूर्व नेता अरुण जेटली ने भी यहाँ बच्चों के लिए एक ओपन स्विमिंग पूल बनवाने में मदद की थी।
किफायती और सुलभ: यह क्लब हमेशा से मध्यमवर्गीय सरकारी परिवारों, वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों की सेवा करता आया है। यहाँ भोजन और बेकरी की सुविधाएं भी काफी उचित दरों पर मिलती हैं।
भेदभाव के खिलाफ उठाई थी आवाज
किरण बेदी ने याद दिलाया कि वह 1975 में एक महिला सदस्य के रूप में इस क्लब से जुड़ी थीं। उस दौर में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था। उन्होंने इस लिंग-भेद को चुनौती दी, जिसके बाद नियमों में बदलाव किया गया और भेदभाव खत्म हुआ। वह क्लब काउंसिल की सदस्य भी रह चुकी हैं।
क्या है पूरा विवाद?
नोटिस की वजह: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले ‘भूमि और विकास कार्यालय’ ने दिल्ली जिमखाना क्लब को बेदखली का नोटिस जारी किया है।
सरकार का तर्क: प्रशासन ने 1928 की मूल लीज डीड के क्लॉज 4 का हवाला देते हुए, सफदरजंग रोड क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे रक्षा बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है।
समय सीमा: क्लब को 5 जून तक का समय दिया गया है, हालांकि यह मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है।
