भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: मानवाधिकार आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव और DGP को जारी किया नोटिस, 4 हफ्तों में मांगी रिपोर्ट

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  • मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप, सेवानिवृत्त जज से जांच की मांग

यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा की शिकायत पर हुई है, जिन्होंने 20 जून को आयोग के समक्ष अपनी याचिका दर्ज कराई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 17 जून को भोजपुर पुलिस द्वारा किया गया यह एनकाउंटर पूरी तरह से फर्जी था और यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। उन्होंने आयोग से इस पूरे घटनाक्रम की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

मृतक के परिजनों का भी कहना है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था, जिसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी।

  • सरकार ने गठित किया न्यायिक जांच आयोग, 5 पुलिसकर्मी निलंबित

बढ़ते विवाद और जनाक्रोश के बीच सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। इस एनकाउंटर का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया है।

इसके साथ ही, घटना के समय मौके पर लापरवाही बरतने के आरोप में एक थानाध्यक्ष (SHO), दो सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक कांस्टेबल सहित कुल 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

  • “एनकाउंटर कोई उपलब्धि नहीं” — पुलिस मुख्यालय

बिहार पुलिस के एडीजी (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। साथ ही, पुलिस मुख्यालय के स्तर पर इसकी वैज्ञानिक और तकनीकी जांच की जिम्मेदारी डीआईजी (शाहाबाद) को सौंपी गई है, जो एफएसएल (FSL) टीम की मदद से अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

एडीजी ने स्पष्ट रूप से माना कि पुलिसकर्मियों ने शुरुआत में अभियुक्त को सही ढंग से हैंडल नहीं किया था। उन्होंने कहा:

  • अपनी ही सरकार पर बरसे जेडीयू अध्यक्ष संजय झा

इस मामले में राजनीतिक मोड़ तब आया जब जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने अपनी ही सरकार की पुलिस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि वायरल वीडियो निश्चित रूप से संदेह पैदा करता है और इस मामले में सिर्फ निलंबन (सस्पेंशन) की कार्रवाई काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का नियम सिर्फ अपराधियों के लिए नहीं है; अगर पुलिसकर्मी भी अपराध करते हैं, तो वे भी बचने नहीं चाहिए और उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

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