इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले एक महीने से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने प्रदर्शनकारियों को उनकी कश्मीरी पहचान के आधार पर निशाना बनाए जाने का विरोध किया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्यों को आतंकी कहे जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इस्लामाबाद में बैठे किसी भी अधिकारी को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन कश्मीरी है।
बिलावल भुट्टो ने पीओके में जारी तनाव को समाप्त करने के लिए बातचीत और राजनीतिक समाधान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का हल बल प्रयोग, दमन या आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि संवाद और आपसी विश्वास से निकाला जा सकता है।
उन्होंने सभी पक्षों की सहमति से एक स्वतंत्र आयोग गठित करने का प्रस्ताव रखा, जो हिंसा की निष्पक्ष जांच करे और विवाद की जड़ में मौजूद राजनीतिक व कानूनी मुद्दों की समीक्षा करे। भुट्टो का कहना है कि पाकिस्तानी राज्य और कश्मीर के लोगों के बीच संबंधों को लोकतांत्रिक अधिकारों, सहमति और आपसी सम्मान के आधार पर दोबारा स्थापित करने की जरूरत है।
तनाव कम करने के उद्देश्य से बिलावल ने JAAC से अपने प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और धरने को अस्थायी रूप से स्थगित करने की अपील की। वहीं पाकिस्तान सरकार से भी आग्रह किया कि आयोग की जांच पूरी होने तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।
अपने पत्र के अंत में बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को मध्यस्थ के रूप में पेश करते हुए कहा कि यदि सभी पक्ष सहमत हों तो उनकी पार्टी पाकिस्तान सरकार, पीओके प्रशासन और JAAC के बीच बातचीत कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि संयम बरतने की अपील का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों की मांगों को कमजोर करना नहीं, बल्कि हिंसा और जानमाल के नुकसान को रोकते हुए राजनीतिक समाधान का रास्ता तैयार करना है।
गौरतलब है कि पीओके में बीते एक महीने से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगह टकराव की घटनाएं सामने आई हैं,
जबकि पुलिस कार्रवाई और दमन के आरोपों के चलते स्थानीय लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
