नई दिल्ली/मुंबई/कुशीनगर: देश में हरी सब्जियों के दामों को लेकर एक ऐसा अजीबोगरीब खेल चल रहा है, जिसे देखकर गाँव के किसान हैरान हैं और शहरों में रहने वाले परेशान! जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश के गाँवों और छोटी मंडियों में हरी सब्जियों को कोई पूछने वाला नहीं है, वहीं दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में कदम रखते ही इनके दाम आसमान छू रहे हैं।
आइए आपको दिखाते हैं कि कैसे एक ही सब्जी देश के अलग-अलग कोनों में ‘अमीर’ और ‘गरीब’ बन चुकी है।

💸 कुशीनगर का हाल: ‘2 रुपये किलो ले जाओ भैया, कोई तो ले लो!‘
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की कप्तानगंज थोक मंडी से जो तस्वीरें और आंकड़े आ रहे हैं, वो किसानों के आंसू निकाल देने वाले हैं:
- भिंडी का तमाशा: मंगलवार सुबह मंडी में भिंडी ₹3 किलो बिक रही थी, लेकिन सिर्फ दो घंटे बाद हालत यह हो गई कि ₹2 किलो पर भी उसे कोई खरीदने को तैयार नहीं था!
- तोरई और परवल: तोरई यहाँ ₹6 किलो के भाव पर पड़ी रही, जबकि परवल ₹100 में पूरा 5 किलो (यानी ₹20 किलो) मिल रहा है।
🚀 मुंबई का हाल: ‘दाम सुनकर पैरों तले जमीन खिसक जाएगी!’
अब सीधे रुख करते हैं मायानगरी मुंबई का, जहाँ कुशीनगर के ही रहने वाले सब्जी विक्रेता दीनानाथ रस्तोगी ने फुटकर भाव की जो हकीकत बताई है, वो होश उड़ाने वाली है:
- जिस भिंडी को गाँव में ₹2 में कोई नहीं पूछ रहा, वही मुंबई में ₹60 से ₹80 किलो की वीआईपी सवारी कर रही है!
- ₹15 किलो वाला करेला मुंबई पहुँचते ही ₹80 किलो का झटका दे रहा है।
- गाँव का ₹10 वाला बैंगन यहाँ ₹60 किलो है, और तोरई-नेनुआ भी ₹60 किलो के भाव पर अकड़ कर बिक रहे हैं।
📊 दिल्ली की आजादपुर मंडी vs फुटकर बाजार (खेल समझिए!)
देश की राजधानी दिल्ली में भी थोक और फुटकर के बीच एक बड़ी खाई देखने को मिल रही है:
| सब्जी का नाम | आजादपुर थोक मंडी का भाव | दिल्ली का फुटकर (रेहड़ी) भाव |
|---|---|---|
| गोभी | ₹20 किलो | ₹80 किलो |
| खीरा | ₹24 किलो | ₹50 किलो |
| तोरई | ₹13 – ₹18 किलो | ₹60 किलो |
| भिंडी | ₹16 किलो | ₹40 किलो |
| मटर | ₹40 – ₹55 किलो | ₹120 किलो (€30 में सिर्फ 250 ग्राम!) |
🤔 आखिर मंडी से आपकी थाली तक आते-आते क्यों ‘लगती है आग’?
दिल्ली के सब्जी विक्रेता शिवसागर ने इसका जो गणित समझाया है, वो हर ग्राहक को जानना जरूरी है:
- भाड़े की मार: मंडी से लेकर रिहायशी इलाकों की रेहड़ी तक माल लाने का किराया बहुत बढ़ गया है।
- 10% माल की बर्बादी: सब्जियां कच्चा सौदा होती हैं, शाम तक धूप और गर्मी में 10% माल सड़ या सूख जाता है, जिसका नुकसान बचे हुए माल से निकालना पड़ता है।
- छंटाई का खेल: ग्राहक को बिल्कुल फ्रेश और ‘नंबर-1’ माल चाहिए। अगर मंडी से 10 किलो तोरई लाई जाए, तो छंटाई के बाद सिर्फ 6 किलो ही बेचने लायक बचती है।
- मुफ़्त का धनिया-मिर्चा: मुंबई के दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों को मुफ़्त में धनिया-मिर्ची देने के चक्कर में भी सब्जियों पर मार्जिन बढ़ाना हमारी मजबूरी बन जाता है।
