पणजी। गोवा में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन का ऐलान किए जाने के बाद कांग्रेस और AAP के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखा पलटवार किया है।
केजरीवाल ने गठबंधन को लेकर कहा था कि बीजेपी का मतदाता कांग्रेस को वोट नहीं दे सकता, लेकिन वह आम आदमी पार्टी को वोट दे सकता है। उनके इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने AAP पर निशाना साधा और उसे ‘इंग्लिश-मीडियम वाली BJP’ करार दिया।
पवन खेड़ा का AAP पर हमला
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केजरीवाल के बयान को आधार बनाते हुए कहा कि खुद AAP प्रमुख यह मान रहे हैं कि बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच ज्यादा अंतर नहीं है। उनके मुताबिक, अगर बीजेपी का वोटर कांग्रेस को वोट नहीं देता लेकिन AAP को वोट दे सकता है, तो इससे दोनों दलों के बीच राजनीतिक समानता का संकेत मिलता है।
पवन खेड़ा के इस बयान के बाद गोवा की राजनीति में AAP और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान और तेज हो गई है। दोनों दलों के बीच यह सियासी बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब गोवा में चुनावी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।
GFP के साथ AAP ने किया ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन
आम आदमी पार्टी ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ मिलकर ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन बनाने का ऐलान किया है। इस गठबंधन को गोवा की राजनीति में एक नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है।
GFP अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने गठबंधन को गोवा के हित में बताया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के दरवाजे समान विचारधारा रखने वाले अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी खुले हैं।
अन्य दलों के लिए भी खुले हैं दरवाजे
विजय सरदेसाई के मुताबिक, ‘गोवा फर्स्ट’ का उद्देश्य गोवा के हितों को प्राथमिकता देना है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में समान विचारधारा वाले अन्य दल भी इस गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं।
गठबंधन के ऐलान के बाद अब गोवा में चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच सीटों और राजनीतिक रणनीति को लेकर नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
गोवा में दिलचस्प हुआ सियासी मुकाबला
AAP और GFP के गठबंधन के बाद कांग्रेस के साथ उनकी सियासी दूरी भी खुलकर सामने आने लगी है। एक तरफ AAP गोवा में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस भी बीजेपी के खिलाफ विपक्षी वोटों को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है।
अब देखना होगा कि ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन में आने वाले दिनों में कौन-कौन से दल शामिल होते हैं और इसका आगामी गोवा विधानसभा चुनाव के सियासी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।
