नई दिल्ली, 3 अगस्त: भारत का ऊर्जा क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेज़ी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। सरकार के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2031-32 तक देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 874 गीगावॉट (GW) तक पहुंच सकती है। बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, बिजली क्षेत्र के विकास की रणनीति में सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का संतुलित उपयोग भी शामिल है। इसके लिए राष्ट्रीय बिजली ग्रिड को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाया जा रहा है ताकि विभिन्न राज्यों के बीच बिजली का सुचारु और सुरक्षित आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं भविष्य की ऊर्जा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन तकनीकों के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सकेगा और पीक डिमांड के समय भी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली मांग में लगातार वृद्धि, औद्योगिक विकास, शहरीकरण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार को देखते हुए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और आधुनिक ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। सरकार का लक्ष्य है कि ऊर्जा सुरक्षा, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।
सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, स्मार्ट ग्रिड तकनीक, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में बड़े निवेश किए जाएंगे, जिससे देश की बिजली व्यवस्था अधिक लचीली, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बन सके।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
