नई दिल्ली:
मिडिल-ईस्ट (मध्य पूर्व) में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव कम होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया है। सोमवार को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में करीब 7 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे कीमतें घटकर 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं। हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में मामूली रिकवरी भी देखने को मिली।
क्यों आई कच्चे तेल में इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने और क्षेत्र में तनाव के संकेत कम होने से तेल आपूर्ति (Supply Chain) को लेकर निवेशकों की चिंताएं दूर हुई हैं। आपूर्ति में बाधा न आने के भरोसे के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी देखने को मिली।
हूती विद्रोहियों के दावों से बाजार में सतर्कताहालांकि तेल बाजार में अभी पूरी तरह से राहत का माहौल नहीं है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों (Energy Facilities) पर हमले का दावा किया है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि अमेरिका और ईरान के बीच तात्कालिक तनाव घटा है, लेकिन क्षेत्र के मौजूदा हालात को देखते हुए स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी दिनों में मिडिल-ईस्ट के घटनाक्रमों के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रह सकता है।
तेल बाजार में बड़ा झटका!
अमेरिका-ईरान तनाव कम होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 7% तक टूटकर 83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं। अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई टालने से तेल आपूर्ति की चिंता घटी है। हालांकि, सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमलों के दावों के बाद विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बाजार में आगे भी अनिश्चितता बनी रह सकती है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
