मुजफ्फराबाद/रावलकोट:
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। बेकाबू महंगाई, भारी बिजली संकट, अनुचित टैक्स नीतियों और राजनीतिक अधिकारों के हनन के खिलाफ स्थानीय जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। हजारों की तादाद में लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने अब इस्लामाबाद की हुकूमत को सीधे चुनौती देते हुए 21 जुलाई तक का आखिरी अल्टीमेटम दे दिया है।
लंबी बातचीत के बाद ‘लॉन्ग मार्च’ पर लगी अस्थायी रोक
मिली जानकारी के मुताबिक, आंदोलन की अगुवाई कर रहे JAAC के कद्दावर नेताओं और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने फिलहाल मुजफ्फराबाद की तरफ बढ़ने वाले अपने ‘लॉन्ग मार्च’ को रोक दिया है। हालांकि, कमेटी ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक अस्थायी विराम है। अगर पाकिस्तान सरकार ने 21 जुलाई तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं कीं, तो 22 जुलाई से यह लॉन्ग मार्च दोबारा शुरू कर दिया जाएगा और आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
रावलकोट में डटे 1.5 लाख लोग, थम नहीं रहा आक्रोश
भले ही लॉन्ग मार्च को कुछ दिनों के लिए रोका गया हो, लेकिन जमीन पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मुजफ्फराबाद मार्च के लिए रावलकोट में करीब 1.5 लाख लोग अब भी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। इस विशाल जनसैलाब में व्यापारियों और युवाओं के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों की भी बड़ी भागीदारी देखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को उनके इलाके खाली करने तक की चेतावनी दे दी है।
क्यों भड़की है PoK में यह चिंगारी? (प्रमुख मांगें)
JAAC के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन के पीछे कई लंबे समय से पेंडिंग मांगें और हालिया विवाद शामिल हैं:
- बिजली और आटे पर सब्सिडी: स्थानीय लोगों का आरोप है कि PoK की नदियों पर बने बांधों से पाकिस्तान खुद बिजली बनाता है, लेकिन वहां के नागरिकों को ही भारी-भरकम बिजली बिल और किल्लत का सामना करना पड़ता है।
- 12 आरक्षित सीटों का विवाद: हाल ही में आए कोर्ट के फैसले के बाद 12 शरणार्थी (Refugee) सीटों का विवाद गहरा गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद के राजनीतिक दल अपने वफादारों को PoK की विधानसभा में बिठाते हैं, जिनका स्थानीय जनता से कोई सरोकार नहीं है।
- अधिकारों का दमन: पाकिस्तान सरकार द्वारा JAAC पर पाबंदियां लगाने और सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद जनता का गुस्सा और भड़क गया है।
आगे क्या होगा?
इस पूरे गतिरोध में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और पाकिस्तानी रेंजरों व पुलिस की कार्रवाई से हालात लगातार हिंसक बने हुए हैं। फिलहाल सबकी नजरें 21 जुलाई की समयसीमा पर टिकी हैं। यदि पाकिस्तानी हुकूमत ने समझौते के तहत ठोस कदम नहीं उठाए, तो 22 जुलाई से PoK में एक बार फिर बड़ा नागरिक विद्रोह देखने को मिल सकता है।
