भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: स्वतंत्र जांच की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, कहा- ‘पहले हाईकोर्ट जाएं’

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नई दिल्ली/पटना, 15 जुलाई 2026:

बिहार के भोजपुर में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को नसीहत दी है कि वे राहत के लिए पहले पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका को खारिज नहीं किया, बल्कि याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय (High Court) जाने का विकल्प दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित राज्य के हाईकोर्ट में अपील की जानी चाहिए, जो जमीनी हकीकत और स्थानीय रिपोर्टों को अधिक प्रभावी ढंग से देख सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीधे शीर्ष अदालत आने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले पटना हाईकोर्ट जाना ही सही कदम होगा।

क्या की गई थी मांग?

भोजपुर में हुए इस एनकाउंटर को लेकर दायर की गई जनहित याचिका में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए थे:

  • ‘फर्जी’ मुठभेड़ का आरोप: याचिकाकर्ता ने इस मुठभेड़ को पूरी तरह ‘फर्जी’ (Fake Encounter) करार दिया था।
  • रिटायर्ड जज से जांच की मांग: याचिका में मांग की गई थी कि पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त (Retired) न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • पुलिसकर्मियों पर FIR: एनकाउंटर में शामिल और इसके लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग भी इस याचिका का मुख्य हिस्सा थी।

मामले की पृष्ठभूमि और राजनीतिक गरमाहट

भोजपुर का भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला काफी समय से बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जहां एक तरफ पुलिस इसे अपनी बड़ी कामयाबी और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग और मानवाधिकार कार्यकर्ता इस मुठभेड़ की सच्चाई पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह तय हो गया है कि इस विवाद की कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव पटना हाईकोर्ट होगा। याचिकाकर्ता अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हाईकोर्ट में नई याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।

मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

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