रायपुर:
राजधानी रायपुर से सटे नकटी गाँव में पिछले दिनों प्रशासन द्वारा की गई बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और बुलडोजर की कार्रवाई का मामला अब एक बड़े सियासी बवंडर में बदल चुका है। इस कार्रवाई का विरोध करने और अपनी ही सरकार के प्रशासन को आड़े हाथों लेने वाले बजरंग दल के तत्कालीन रायपुर जिला संयोजक विजेंद्र वर्मा (वीरेंद्र वर्मा) को संगठन ने ‘अनुशासनहीनता’ के आरोप में पद से निष्कासित कर दिया था।
पद से हटाए जाने के बाद पहली बार कैमरे के सामने आकर विजेंद्र वर्मा ने जो खुलासे और बयान दिए हैं, उसने छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है।
गरीबों के आशियाने उजड़े, मलबे में दबी गौमाता’ – विजेंद्र वर्मा
कैमरे पर अपनी बात रखते हुए विजेंद्र वर्मा बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नकटी गाँव में प्रशासन ने बिना सोचे-समझे जो कार्रवाई की, उसने सिर्फ गरीबों के सिर से छत नहीं छीनी, बल्कि एक महापाप को भी जन्म दिया।
“कार्रवाई के दौरान बेतरतीब ढंग से मलबे गिराए गए, जिसके नीचे दबने से बेजुबान गौमाता की भी मौत हो गई। एक तरफ हम गौ-संरक्षण की बात करते हैं और दूसरी तरफ हमारी ही सरकार का प्रशासन इस तरह की संवेदनहीनता दिखाता है, इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी दल या सरकार से नहीं, बल्कि निरंकुश हो चुके प्रशासन और अधिकारियों के तानाशाही रवैये के खिलाफ था।
बजरंग दल ने क्यों की कार्रवाई?
नकटी गाँव में हुई इस तोड़फोड़ के बाद विजेंद्र वर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के सामने हनुमान चालीसा का पाठ कर तीखा विरोध प्रदर्शन किया था। चूंकि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है,
ऐसे में हिंदूवादी संगठन के जिला संयोजक द्वारा अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ इस तरह का उग्र मोर्चा खोलना संगठन को रास नहीं आया। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के शीर्ष नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना और विजेंद्र वर्मा को तत्काल प्रभाव से जिला संयोजक के पद से कार्यमुक्त कर दिया।
कैमरे पर आए विजेंद्र वर्मा: छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया धमाका
निष्कासन के बाद पहली बार मीडिया के सामने आए विजेंद्र वर्मा के तेवर ढीले होने के बजाय और तीखे नजर आए। उन्होंने कैमरे पर खुलकर अपनी बात रखते हुए छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
प्रशासनिक अधिकारियों पर साधा निशाना: उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल करने की साजिश रच रहे हैं और जमीनी हकीकत से दूर होकर फैसले ले रहे हैं।
हिंदुत्व और जनहित सर्वोपरि: वर्मा ने दोटूक शब्दों में कहा, “पद रहे न रहे, लेकिन जब भी गरीबों के आशियाने उजाड़े जाएंगे और गौमाता पर आंच आएगी, विजेंद्र वर्मा चुप नहीं बैठेगा। संगठन का फैसला सिर माथे पर है, लेकिन जनता और हिंदुत्व की लड़ाई जारी रहेगी।”
क्या होगा इसका सियासी असर?
विजेंद्र वर्मा के इस कदम और तीखे बयानों ने सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस कार्रवाई के बाद हिंदूवादी संगठनों और प्रशासनिक तालमेल के बीच कोई बड़ी खाई खिंच गई है?
आने वाले दिनों में विजेंद्र वर्मा का यह ‘कैमरा धमाका’ राज्य की राजनीति में क्या नया मोड़ लाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
