हैदराबाद। तेलंगाना की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। चुनाव आयोग (ECI) ने बीआरएस नेता और पूर्व एमएलसी के. कविता को उनकी नई राजनीतिक पार्टी के नाम में ‘TRS’ (टीआरएस) का इस्तेमाल करने को लेकर नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह कदम पार्टी के नाम को लेकर मिली 1,100 से अधिक शिकायतों के आधार पर उठाया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ‘TRS’ नाम के इस्तेमाल से मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि यह नाम लंबे समय तक तेलंगाना की प्रमुख राजनीतिक पार्टी से जुड़ा रहा है।
जानकारी के अनुसार, के. कविता ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के लिए शुरुआत में ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना (TRS)’ नाम प्रस्तावित किया था। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस नाम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पहले से प्रचलित राजनीतिक पहचान से काफी मिलता-जुलता है और इससे चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं में भ्रम पैदा होने की आशंका है। इसके बाद कविता ने अपनी पार्टी का नाम बदलकर ‘तेलंगाना रक्षणा सेना’ कर दिया, लेकिन इसके संक्षिप्त रूप ‘TRS’ को बनाए रखने पर विवाद जारी रहा।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में भारत राष्ट्र समिति (BRS) सहित विभिन्न संगठनों और नागरिकों की ओर से चुनाव आयोग को बड़ी संख्या में शिकायतें भेजी गई थीं। शिकायतों में मांग की गई थी कि किसी भी नई पार्टी को ऐसा नाम या संक्षिप्त रूप इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जिससे पहले से स्थापित राजनीतिक दल की पहचान प्रभावित हो या मतदाता भ्रमित हों।
इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने के. कविता को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। आयोग अब उनके जवाब का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद मामले में आगे का निर्णय लिया जाएगा।
वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक के. कविता चुनाव आयोग के इस कदम से सहमत नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प अपनाने पर भी विचार कर सकती हैं। उनका पक्ष है कि पार्टी का पूरा नाम बदल दिया गया है और केवल संक्षिप्त रूप को लेकर आपत्ति उचित नहीं है।
इस घटनाक्रम ने तेलंगाना की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग के अगले फैसले और के. कविता की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
