हैदराबाद: तेलंगाना की वित्तीय स्थिति को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में राज्य पर कुल ₹8,21,651 करोड़ की देनदारियां और कर्ज का बोझ छोड़ दिया गया।
भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि BRS सरकार ने अपने दस वर्षों के शासनकाल में राज्य की आर्थिक व्यवस्था को कमजोर किया और विभिन्न माध्यमों से भारी वित्तीय दायित्व खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि इस राशि में केवल प्रत्यक्ष सरकारी ऋण ही नहीं, बल्कि सरकारी निगमों द्वारा लिए गए कर्ज, कर्मचारियों के लंबित भुगतान, बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) की देनदारियां और अन्य वित्तीय दायित्व भी शामिल हैं।
कांग्रेस सरकार का दावा
डिप्टी CM ने कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उनके अनुसार, पिछले 30 महीनों के दौरान सरकार ने ₹2.08 लाख करोड़ की राशि मूलधन और ब्याज के भुगतान में खर्च की है। इसके साथ ही ऊंची ब्याज दर वाले कई ऋणों का पुनर्गठन (Debt Restructuring) किया गया है, जिससे भविष्य में राज्य पर वित्तीय दबाव कम होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका दावा है कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है।
BRS पर लगाया भ्रामक प्रचार का आरोप
भट्टी विक्रमार्का ने आरोप लगाया कि BRS लगातार राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि मौजूदा सरकार को पिछली सरकार की वित्तीय विरासत का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पारदर्शिता के साथ वित्तीय प्रबंधन कर रही है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुधार लागू किए जा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
तेलंगाना में आर्थिक मुद्दों को लेकर कांग्रेस और BRS के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक ओर कांग्रेस सरकार का दावा है कि उसे भारी कर्ज और वित्तीय दायित्वों वाली व्यवस्था विरासत में मिली है, वहीं BRS लगातार राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है।
