हैदराबाद: भारत-पाकिस्तान वार्ता को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष रामचंदर राव ने कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।
रामचंदर राव ने कहा कि उमर अब्दुल्ला द्वारा भारत-पाकिस्तान वार्ता की वकालत करना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा और दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने के लिए किए गए अन्य प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा शांति की पहल की, लेकिन पाकिस्तान ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया। उनका आरोप था कि पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, जिसके कारण भारत को कई बार कड़ा जवाब देना पड़ा।
बीजेपी नेता ने कहा कि भारत न तो युद्ध चाहता है और न ही किसी दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है। उन्होंने कहा कि देश का उद्देश्य केवल अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा करना है। उनके अनुसार, यदि पाकिस्तान वास्तव में बेहतर संबंध चाहता है, तो उसे अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों और प्रशिक्षण शिविरों को पूरी तरह खत्म करना होगा।
रामचंदर राव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी पाकिस्तान पर दबाव बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देना जारी रखता है, तो उस पर सख्त अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई और प्रतिबंधों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आतंकवाद और शांति वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते। पहले आतंकवाद समाप्त होना चाहिए, तभी दोनों देशों के बीच सार्थक और स्थायी बातचीत का रास्ता खुल सकता है।
दरअसल, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद बहाल करने का समर्थन किया था। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए बातचीत ही सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसे संगठन भी संवाद की बात कर रहे हैं, तो इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
भारत-पाकिस्तान संबंध लंबे समय से आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और सुरक्षा मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर बातचीत बनाम आतंकवाद का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच इस विषय पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
