रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नजदीकी गांव सम्मानपुर-नकटी में सोमवार को उस समय भारी तनाव फैल गया, जब प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची। कार्रवाई का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बुलडोजर के सामने बैठ गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी हुई।
बरसात में घर टूटने से बढ़ा आक्रोश, PMAY पर भी उठे सवाल
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान गांव में अफरा-तफरी और भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिले। कई महिलाएं अपने आशियाने को उजड़ता देख रो पड़ीं। ग्रामीणों का कहना है कि इस कड़कड़ाती बरसात के मौसम में उनके घर तोड़े जा रहे हैं, जिससे उनके सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस क्षेत्र में बने करीब 30 मकान प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत स्वीकृत और निर्मित हैं। ऐसे में सरकारी योजना के तहत बने घरों को ही अवैध बताकर तोड़ना समझ से परे है। गांव के कुल 70 से अधिक मकानों पर प्रशासन की यह कार्रवाई प्रस्तावित है।
जमीन के मालिकाना हक पर दो अलग-अलग दावे
इस पूरी विवादित जमीन को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के अपने-अपने तर्क हैं:
- ग्रामीणों का आरोप: यह उनके पूर्वजों की भूमि है, जहां वे कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार इस कीमती जमीन को खाली कराकर यहाँ जनप्रतिनिधियों के लिए एक आलीशान कॉलोनी विकसित करना चाहती है।
- प्रशासन का पक्ष: सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में ‘शामिलात चारागाह’ (सरकारी जमीन) के रूप में दर्ज है, जिस पर अवैध कब्जा किया गया था। नियमानुसार दो दिन पहले नोटिस जारी करने के बाद ही यह कार्रवाई शुरू की गई है।
प्रभावित परिवारों को सेक्टर-30 में किया जा रहा शिफ्ट
तनाव के बीच प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से शुरू कर दी है। बेघर हो रहे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित सेक्टर-30 में शिफ्ट किया जा रहा है। मौके पर सामान ढोने के लिए गाड़ियां तैनात की गई हैं और प्रशासनिक अमला खुद सामान शिफ्ट करवाने में जुटा है।
