तकनीक का उद्देश्य केवल डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन होना चाहिए: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में बोले राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

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जयपुर, 1 जुलाई। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आधुनिक तकनीक का वास्तविक उद्देश्य केवल सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान अवसर और सुविधाएं पहुंचाकर सामाजिक समावेशन को मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने यह बात जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (National e-Governance Conference 2026) के उद्घाटन अवसर पर कही। सम्मेलन का विषय “विकसित भारत 2047: एआई-सक्षम, डेटा-आधारित एवं सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस” रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी तकनीक विकसित करने और अपनाने की है, जो आम नागरिकों के जीवन को सरल बनाए, सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाए और शासन व्यवस्था में जवाबदेही को मजबूत करे। उनके अनुसार डिजिटल परिवर्तन का उद्देश्य केवल तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि नागरिकों का सशक्तिकरण भी है।

भजनलाल शर्मा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था की आधारशिला बन रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन तकनीकों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं में प्रभावी तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए नवाचार कर रही है। राज्य में तकनीक आधारित सेवाओं के विस्तार, पारदर्शी प्रशासन और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली को मजबूत करने के लिए विभिन्न डिजिटल पहलें लागू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से भारत डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित करेगा।

दो दिवसीय राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा शिक्षाविद भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शासन, डिजिटल समावेशन, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, क्वांटम तकनीक, स्मार्ट सार्वजनिक सेवाओं और नागरिक-केंद्रित प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया जाएगा। साथ ही, ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभिन्न सरकारी संस्थाओं को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीक को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब डिजिटल नवाचार समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा और सभी नागरिकों को समान अवसर उपलब्ध कराएगा, तभी सच्चे अर्थों में समावेशी और सशक्त भारत का निर्माण संभव होगा

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