भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, बोले- “वह पागल नहीं था, सिस्टम ने उसे उस स्थिति तक पहुंचाया”

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भोजपुर। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार Prashant Kishor ने चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भोजपुर जिले के बिलौटी गांव पहुंचकर उन्होंने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भरत तिवारी को केवल एक अपराधी या मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा है।

प्रशांत किशोर ने परिजनों से बातचीत के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भरत तिवारी “पागल नहीं था”, बल्कि वह लगातार प्रशासनिक दबाव, व्यवस्था की विफलताओं और अधिकारियों के रवैये से परेशान था। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक न्याय नहीं मिलता, उसकी शिकायतें अनसुनी कर दी जाती हैं और उसे व्यवस्था से निराशा हाथ लगती है, तो उसकी मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

परिवार से मुलाकात के बाद उठाए सवाल

बिलौटी गांव में भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात के दौरान प्रशांत किशोर ने उनके परिजनों का पक्ष सुना। परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर एनकाउंटर को लेकर कई सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। इसके बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस तरह की बातें परिवार की ओर से सामने आई हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर जैसे मामलों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। यदि किसी घटना को लेकर समाज में संदेह और सवाल पैदा हो रहे हैं, तो सरकार का दायित्व है कि वह तथ्यों को सामने लाए और जनता का विश्वास कायम रखे।

“संदिग्ध है पूरा एनकाउंटर”

प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी के एनकाउंटर को संदिग्ध बताते हुए कहा कि मामले की गहराई से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है तो जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन यदि कहीं कोई चूक या अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

प्रशासनिक व्यवस्था पर साधा निशाना

जन सुराज नेता ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिक के बीच बढ़ती दूरी का भी प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लोग अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों और सरकारी तंत्र के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन उन्हें समय पर न्याय नहीं मिलता।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जब व्यवस्था आम लोगों की बात सुनना बंद कर देती है, तब निराशा और आक्रोश पैदा होता है। उन्होंने दावा किया कि भरत तिवारी भी ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रहा था और उसे लगातार दबाव झेलना पड़ा।

सरकार से की निष्पक्ष जांच की मांग

प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता चाहती है तो उसे किसी भी तरह की आशंकाओं को दूर करने के लिए स्वतंत्र जांच का रास्ता अपनाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कानून का शासन तभी मजबूत माना जाएगा जब हर मामले में निष्पक्षता दिखाई दे और जनता को यह भरोसा हो कि न्याय प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं है।

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ी चर्चा

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। अब प्रशांत किशोर के बयान के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा पहले से ही मामले की जांच की मांग की जा रही थी। ऐसे में जन सुराज के प्रमुख नेता के हस्तक्षेप के बाद इस मामले पर बहस और तेज होने की संभावना है।

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