कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम ढहने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। हादसे के बाद जहां राहत और बचाव कार्य जारी है, वहीं गोदाम के बिल्डिंग प्लान को मंजूरी देने को लेकर पूर्व मेयर फिरहाद हकीम पर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, फिरहाद हकीम ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बेवजह इस मामले में घसीटा जा रहा है।
“मेयर को प्लान पास करने का अधिकार नहीं” – फिरहाद हकीम
पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने स्पष्ट किया कि कोलकाता नगर निगम (KMC) में किसी भी भवन निर्माण योजना को मंजूरी देने की एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि मेयर व्यक्तिगत रूप से किसी भवन का प्लान पास नहीं करता और न ही उसके पास ऐसा कोई अधिकार होता है। बिल्डिंग प्लान से जुड़े सभी फैसले संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक विभाग तय नियमों के तहत लेते हैं। इसलिए इस हादसे के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
विपक्ष ने सरकार और प्रशासन को घेरा
वेयरहाउस गिरने की घटना के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और नगर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य नियमों के अनुसार हुआ होता और निगरानी सही तरीके से की जाती, तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि निर्माणाधीन गोदाम को अनुमति किस आधार पर दी गई थी, निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
हादसे के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार से मृतकों और घायलों के परिवारों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग की है। साथ ही, जिन परिवारों ने अपने सदस्य खोए हैं, उनके एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग उठाई गई है। विपक्ष का कहना है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पीड़ित परिवारों को ठोस राहत और न्याय मिलना चाहिए।
जांच पर टिकी सबकी नजर
वेयरहाउस हादसे के बाद अब पूरे मामले की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। जांच से यह स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्य में किसी तरह की तकनीकी खामी, नियमों की अनदेखी या प्रशासनिक लापरवाही हुई थी या नहीं। इस बीच, घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में और गर्माने की संभावना है।
