रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस आज अपनी ‘विशेष जांच समिति’ की रिपोर्ट सार्वजनिक करने जा रही है। रिपोर्ट जारी करने के बाद, कांग्रेस इस मामले को लेकर सीधे राजभवन का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी आगामी 10 जुलाई को राज्यपाल से मुलाकात कर प्रभावित परिवारों के न्याय के लिए एक ज्ञापन सौंपेगी।
कांग्रेस ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। प्रदेश कांग्रेस द्वारा राज्यपाल के एडीसी को भेजे गए पत्र के मुताबिक, पार्टी का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस मुलाकात में शामिल होगा।
कांग्रेस का आरोप: “बारिश के मौसम में उजाड़े 85 परिवार”
कांग्रेस का कहना है कि नकटी गांव में कड़कड़ाती बारिश के दौरान जिस अमानवीय तरीके से 85 परिवारों के आशियानों पर बुलडोजर चलाया गया, वह पूरी तरह गलत है। प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और उनके पुनर्वास की मांग को लेकर कांग्रेस राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करेगी।

आज रायपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धनेंद्र साहू, शिव डहरिया, श्री कुमार मेनन और राजेंद्र पप्पू बंजारे समेत जांच समिति के सदस्य एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) करेंगे। इस दौरान न केवल जांच रिपोर्ट को मीडिया के सामने रखा जाएगा, बल्कि इस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस अपना आधिकारिक और कड़ा रुख भी स्पष्ट करेगी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने भी सरकार पर इस मामले में लगातार गलत और विरोधाभासी बयान देने के आरोप लगाए हैं।
सरकार का पलटवार: “पूरा गांव नहीं, सिर्फ एक वार्ड से हटा अतिक्रमण”
दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे नियमानुसार की गई कार्रवाई बताया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि:
- भ्रम फैलाया जा रहा है: नकटी गांव में कुल 17 वार्ड हैं, जिनमें से केवल एक वार्ड में सरकारी जमीन पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाया गया है। पूरा गांव उजाड़े जाने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत है।
- कांग्रेस सरकार में शुरू हुई थी प्रक्रिया: वन मंत्री ने दावा किया कि इस संबंधित जमीन को आवासीय योजना के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया साल 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान ही शुरू की गई थी।
- पुनर्वास का दावा: सरकार का कहना है कि बेघर हुए प्रभावित परिवारों का नियमानुसार पुनर्वास कर दिया गया है और उन्हें नया रायपुर में पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं।
अब सबकी नजरें 10 जुलाई पर
एक ओर जहाँ कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को चौतरफा घेरने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट को ‘हथियार’ बना रही है, वहीं सरकार इसे पूरी तरह वैध और जनहित में की गई कार्रवाई बता रही है। ऐसे में अब 10 जुलाई को कांग्रेस के राजभवन दौरे और राज्यपाल के रुख पर पूरे प्रदेश की राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।
